परिवार के मुताबिक, मनप्रीत को 2 से 3 दिन तक लगातार वेंटिलेंटर पर रखा गया। फिर 18 सितंबर की देर रात परिवार ने डॉक्टर से कहा कि अगर उनसे इलाज नहीं हो रहा तो वह मनप्रीत को रेफर कर दें। वह पीजीआई ले जाएंगे। डॉक्टर ने कहा कि अगर वेंटिलेंटर उतारा तो उनके बेटे की तीन मिनट बाद मौत हो जाएगी। मनप्रीत के पिता रामजी के मुताबिक देर रात करीब ढाई बजे अस्पताल स्टाफ ने बताया कि उनके बेटे की मौत हो चुकी है। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने शव देने के लिए सुबह 9 बजे का समय दिया।
पुलिसकर्मीं होने की वजह से मनप्रीत के शव का पोस्टमार्टम होना था। जब उसे साथी पुलिस कर्मियों की मदद से एंबुलेंस में रखा जा रहा था तो अचानक एक मुलाजिम को महसूस हुआ कि मनप्रीत की नब्ज और सांस चल रही है। इसके बाद अस्पताल प्रशासन से जबरदस्ती ऑक्सीजन का सिलिंडर एंबुलेंस में रखवाकर मनप्रीत को डीएमसी अस्पताल में शिफ्ट किया गया। वहां डॉक्टरों ने उसका उपचार शुरू किया और अब उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
हमनें डेथ समरी नहीं दी, मरीज को लामा समरी के साथ जिंदा भेजा
निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने दावा किया कि मनप्रीत को अस्पताल से भेजते समय लामा समरी दी गई थी। अगर उसकी मौत हुई होती तो डेथ समरी दी जाती। मनप्रीत को जिंदा ही परिवार के हवाले किया था और कहा था कि उसके जीवित बचने की उम्मीद कम है। एम्स बस्सी अस्पताल के डॉ. साहिल ने बताया कि मनप्रीत की किडनी काम नहीं कर रही थी। बीपी में गड़बड़ होने के कारण उसकी हालत बहुत खराब थी। पूरी बाजू गली हुई थी और उस पर इंजेक्शन लगे होने के निशान थे। बाजू की नसें भी ब्लॉक थी।
मनप्रीत के परिवार ने यह नहीं बताया था कि उसे जहरीले कीड़े ने काटा है। सिर्फ यही कहा था कि बेटे की लात और बाजू पर जख्म हैं। डॉक्टर साहिल ने कहा कि रात 12 बजे के करीब मनप्रीत के पिता से कह दिया था कि उनका बेटा बचने की हालत में नहीं लेकिन परिवार ने उसे सुबह लेकर जाने की बात कही थी। डॉक्टर साहिल के मुताबिक उनके स्टाफ में से किसी ने भी मनप्रीत की मौत की पुष्टि नहीं की। उनका स्टाफ मरीज को बाकायदा ऑक्सीजन सिलिंडर के साथ डीएमसी अस्पताल छोड़कर आया है। सभी आरोप निराधार हैं।
पुलिस लाइन में शोक की लहर, गांव में चल रही थी संस्कार की तैयारी
मनप्रीत के पिता एएसआई रामजी ने बताया कि जब उनके बेटे की मौत की खबर पुलिस लाइन, रिश्तेदारों, गांव के लोगों तक पहुंची तो हर तरफ शोक व्याप्त हो गया। गांव में अंतिम संस्कार के लिए चिता की लकड़ियां एकत्र की जाने लगीं और गुरुद्वारा साहिब में भी पता चल गया। परिवारिक सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। बेटे की नब्ज और सांसें चलने के बारे में पता चलते ही तुरंत सभी रिश्तेदारों और परिचितों को सूचित किया। इसके बाद परिवार ने राहत की सांस ली। रामजी ने कहा कि वह बेटे के ठीक होने पर कानूनी कार्रवाई करेंगे।