एसडीएम दफ्तर के सामने भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर द्वारा दिए जा रहे रोष धरने में दो दिन पहले बठिंडा के किसान जगसीर सिंह के खुदकुशी करने का मामला तनावपूर्ण हो चुका है। रविवार को भाकियू ने किसान के शव को सिविल अस्पताल से उठाकर धरना स्थल पर रख लिया था।
वहीं सोमवार शाम शव को एक जीप में रखकर अपने धरने को रेलवे ट्रैक पर ले जाने की चेतावनी दी। हालांकि भाकियू के संघर्ष तेज करने की आशंका के चलते जिला पुलिस ने सुबह से ही धरनास्थल के क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया था। अब उनके रेलवे ट्रैक पर जाने की धमकी के बाद पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार भाकियू के कार्यकर्ता रविवार शाम यह आरोप लगाते हुए किसान के शव को धरनास्थल पर ले आए थे कि सिविल अस्पताल में प्रशासन द्वारा जानबूझ कर शवगृह की लाइट बंद कर दी गई है ताकि शव की हालत खराब हो जाए। पुलिस प्रशासन को आशंका थी कि अब भाकियू की तरफ से शव को साथ लेकर किसी हाईवे या रेलवे ट्रैक पर धरना दिया जा सकता है जिसके चलते सोमवार सुबह से भी एसडीएम दफ्तर के आसपास भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई।
सुबह से ही भाकियू पदाधिकारियों के साथ आईजी फिरोजपुर बी चंद्रशेखर समेत जिले के आला पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बैठकें की जा रही थी लेकिन जब कोई बात सिरे नहीं लगी तो शाम के समय मुख्यमंत्री के ओएसडी कैप्टन संदीप सिंह संधू, राजनीतिक सलाहकार व विधायक कुशलदीप सिंह ढिल्लों भी जैतो पहुंचे और भाकियू को मनाने का प्रयास शुरू किया।
इस मौके पर भाकियू के प्रांतीय प्रधान जगजीत सिंह डल्लेवाला ने कहा कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक वह पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने पराली जलाने के आरोप में दर्ज केस रद्द करने, जुर्माना माफ करने व रेड एंट्री हटाने के साथ साथ खुदकुशी करने वाले किसान के परिवार को एक करोड़ का मुआवजा व परिवार को एक सरकारी नौकरी देने की मांग दोहराई। खबर लिखे जाने तक भी भाकियू पदाधिकारियों के साथ बैठक जारी थी।