लुधियाना के घंटाघर चौक बम ब्लास्ट मामले में 24 साल बाद सोमवार को आतंकी जगतार सिंह हवारा को बरी कर दिया गया। इस मामले में पुलिस ने छह लोगों को आरोपी बनाया था। एक आरोपी को 2003 में बरी कर दिया गया था, जबकि आतंकी परमजीत सिंह भ्यौरा पर चार्ज फ्रेम नहीं हो पाए थे। दो आरोपी बलजिंदर सिंह और प्रीतम सिंह को अदालत में भगौड़ा करार दिया था। आतंकी हवारा को एडिशनल सेशन जज अतुल कसाना की अदालत में बरी करने का फैसला सुना दिया है।
जानकारी के अनुसार छह दिसंबर 1995 की सुबह घंटा घर चौक में बम धमाका हुआ था। बम को अखबार बांटने वालों को टारगेट कर एक खंभे के साथ लगाया गया था। इस धमाके में कुछ हॉकर घायल हुए थे। थाना कोतवाली पुलिस ने मामले में एफआईआर नंबर 33 दर्ज की थी। पहले इसे अज्ञात के खिलाफ दर्ज किया था। बाद में 11 दिसंबर 1995 को पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों को नामजद किया था।
जगतार सिंह हवारा के वकील जसपाल सिंह ने बताया कि पुलिस ने इस मामले में जगतार सिंह हवारा, बिक्रम सिंह निवासी खमाणो, परमजीत सिंह भ्यौरा, बलजिंदर सिंह और प्रीतम सिंह को नामजद किया था। 23 दिसंबर 1995 को पुलिस ने इस मामले में हवारा को गिरफ्तार किया था। 25 फरवरी 2003 को एडिशनल सेशन जज सुनील कुमार की अदालत ने बिक्रमजीत सिंह को मामले से बरी कर दिया था।
बलजिंदर सिंह और प्रीतम की गिरफ्तारी नहीं हो पाने के कारण उन्हें भगौड़ा घोषित कर दिया गया। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्या के मामले में हवारा का नाम आने पर यह केस बंद हो गया था। 26 जून 2015 को उन्होंने अदालत में आवेदन कर दोबारा केस शुरू करने के लिए कहा। 12 मई 2017 को हवारा पर चार्ज फ्रेम किए गए। इस मामले में 23 लोगों की गवाही हुई लेकिन दूसरा पक्ष पुख्ता सबूत पेश करने में नाकाम रहा। सोमवार को अदालत ने इस मामले में जगतार सिंह हवारा को बरी कर दिया है।