चंडीगढ़। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में कालका और पिंजौर क्षेत्रों को नगर निगम, पंचकूला की सीमाओं से अलग करने व अलग नगर परिषद, कालका के गठन की स्वीकृति प्रदान की गई है। नगर निगम,पंचकूला से इसे अलग करके कालका एवं पिंजौर क्षेत्र के लिए एक सांझा नगर निकाय बनने से कालका और पिंजौर क्षेत्र के लोगों के लिए निकटतम स्थल पर विभिन्न पालिका सेवाओं का लाभ उठाना अत्यंत सुविधजनक होगा। जिससे समय, दूरी और लागत में कमी आएगी। मौजूदा नगर निगम, पंचकूला का क्षेत्र अब 2 क्षेत्रों में विभाजित किया जाएगा। कालका व पिंजौर के सामने लोग लंबे अरसे से इस मांग को बुलंद किए हुए थे
पिंजौर, कालका में ये गांव शामिल होंगे
पिंजौर के 22 गांवों में भगवानपुर, बिटना, धामला, इस्लाम नगर, लोहगढ़, सूरजपुर, मानकपुर देवीलाल, मानकपुर नानकचंद, मानकपुर ठाकरदास, राज्जीपुर, मोहबतपुर, मिल्क, गुमथला, भोगपुर, दमदमा, बिसावल, खेड़ा, माजरी जट्टा, रामपुर सियूड़ी, वासुदेवपुरी, मीरपुर, बक्शीवाला और रायपुर शामिल हैं। कालका के 21 गांवों भैरो की सैर, कांगुवाला, खेड़ा सीताराम, टी डांगरा, हंसुआ, टांगरा, हाकिमपुर, टांगरा हरिसिंह, टांगरा कलीराम, टांगरा कंगन, टांगरा साहू, टिपरा और माजरा महताब शामिल हैं।
पंचकूला की लाइसेंस, सीएलयू शुल्क दरें मोहाली के बराबर होंगी
मंत्रिमंडल की बैठक में पंचकूला में लाइसेंस और सीएलयू की अनुमति प्रदान करने के लिए विभिन्न फीस एवं शुल्कों की दर में संशोधन करने की स्वीकृति प्रदान की गई ताकि जिला में आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया जा सके। बताते चलें कि हरियाणा के वित्त मंत्री ने विगत बजट सत्र के दौरान अपने बजट भाषण में पंचकूला में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए पंचकूला में लाइसेंस और सीएलयू की अनुमति देने हेतु लागू फीस एवं शुल्कों को वर्ष 2020-21 और 2021-22 के लिए पंजाब के मोहाली के बराबर करने के लिए उन्हें संशोधित करने की घोषणा की थी। जिला पंचकूला में उच्च संभावित क्षेत्र के साथ-साथ निम्र संभावित क्षेत्रों में सभी दरें अब मोहाली के बराबर या उससे कम होंगी, यदि अधिसूचित दरें पहले से ही मोहाली से कम हैं तो। जिला पंचकूला के निम्र संभावित क्षेत्र में शुल्क एवं फीस की कोई भी विशिष्ट दर या तो जिले के उच्च संभावित क्षेत्र के बराबर या उससे कम होगी।
साढे़ पांच सालों में करवाना होगा नवगठित निगमों का चुनाव
हरियाणा मंत्रिमंडल द्वारा नवगठित नगर निगमों का पहला चुनाव उनके गठन की तिथि से पांच वर्ष की निर्धारित सीमा से बढ़ाकर साढ़े पांच वर्ष के अंदर आयोजित करवाने के लिए हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा 4(4) में संशोधन करने के लिए अध्यादेश जारी करने का भी निर्णय लिया गया। नगर निगम, सोनीपत के मामले में उक्त 5 वर्ष की अवधि 5 जुलाई को पूरी हो गई है। वार्डबंदी तथा सीटों व वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है, परंतु कोविड-19 महामारी के चलते नगर निगम, सोनीपत के चुनाव करवा पाना संभव नहीं है।