याचिका में आरोप लगाया गया कि सरकार ने इस फैसले के खिलाफ बेमन से अपील की, उस पर राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी के पक्ष में फैसला आ गया। इसके बाद सरकार ने 2012 में दोबारा इसी जमीन का अधिग्रहण कर 1,83,59,250 मुआवजा जारी कर दिया। इस तरह एक ही जमीन का दो बार अधिग्रहण कर मुआवजा ले लिया गया।
यह मामला सामने आने के बाद सरकार पर दबाव बना तो सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित कर जांच करवाई, जिसमे सामने आ गया कि एक ही जमीन का दो बार अधिग्रहण कर मुआवजा लिया गया।
इतना ही नहीं, पंजाब सरकार ने इसे स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट में हलफनामा भी दे दिया था। इसके बावजूद अभी तक सरकार ने अपने ही मंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। तीनों याचिकाकर्ताओं ने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि यह व्यापक जनहित से जुड़ा मामला है और ऐसे में इस मामले की सीबीआई से जांच बेहद जरूरी है।