चंडीगढ़। सात दिवसीय पीजीआई स्पोर्ट्स मीट का रविवार को समापन हो गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि एसएसपी मनोज कुमार मीणा, गोल्फ क्लब के अध्यक्ष रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल एचएस चहल, डीन एकेडमिक जीडी पुरी और स्पोर्ट्स फैकल्टी बलजिंदर सिंह ने भार्गव सभागार में विजेताओं को मेडल और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। चहल ने खेलों को थकान को मिटाने और विश्राम करने का सबसे बेहतर माध्यम बताया। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि दिनभर में कुछ समय निकालकर खेल को जरूर दें।
चहल ने कहा कि डॉक्टर को भगवान माना जाता है, लेकिन कभी किसी की जान चली जाए तो हम अपना आपा खो देते हैं। वास्तव में डॉक्टरों का काम काफी कठिन होता है, इसलिए लोगों को उनका सहयोग करना चाहिए। मनोज कुमार मीणा ने कहा कि खेल गतिविधियों से हौसला बढ़ता है। एसोसिएशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर का यह प्रयास काफी सराहनीय है। डॉ. जीडी पुरी ने कहा कि जब डॉक्टर बन रहा था तो काफी खेलों में भाग लेता था और मेडल लेकर आता था, क्योंकि एक डॉक्टर के लिए खुद को स्वस्थ रखना भी जरूरी है।
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एसएसपी मनोज मीणा की बात पर लगे ठहाके
एसएसपी मनोज मीणा ने कहा कि व्यस्तता के बीच पुलिसकर्मी भी कुछ खेल गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं ताकि अपनी फिटनेस को बरकरार रख सकें। मैं मंच से प्रस्ताव देता हूं कि पीजीआई और पुलिस की टीम के बीच एक मैत्री क्रिकेट मैच हो जाए। पुलिस के पास दक्ष शूटर भी हैं, इसलिए शूटिंग प्रतियोगिता का भी प्रस्ताव रखता हूं। इस बात पर सबने ठहाके लगाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि मैं खेल में दक्ष पुलिसकर्मियों की बात कर रहा हूं, अपराधियों के लिए दूसरे शूटर हैं।
बेटे ने पिता को समर्पित किया मेडल, पिता बोले- फादर्स डे पर मेरे लिए सम्मान की बात
स्विमिंग प्रतियोगिता में विजेता साहिल बंसल ने अपना पुरस्कार पिता को समर्पित किया। उन्होंने मंच से कहा कि मैं सौभाग्यशाली हूं कि आज फादर्स डे पर पुरस्कार मिल रहा है। पिता के लिए इससे बड़े सम्मान की बात और क्या हो सकती है। इसके बाद सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
राहुल चक्रवर्ती बोले- ऐसे ही मौका मिला तो डॉक्टर दुनिया में करेंगे नाम रोशन
एसोसिएशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर के अध्यक्ष राहुल चक्रवर्ती ने सभी अतिथियों और पीजीआई प्रबंधन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के मौके डॉक्टरों को मिलेंगे तो वह केवल शहर में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में नाम रोशन करेंगे। एसोसिएशन ने एक छोटा सा प्रयास किया है। इसमें लगभग 500 प्रतिभागियों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। दिनभर की थकान के बावजूद मैदान पर शाम को चुस्त दुरुस्त दिखना खेल के प्रति डॉक्टरों के उत्साह को दिखाता है।