कोराना काल में पीजीआई ने उत्तर भारत में 50 कोविड मॉलीक्यूलर लैब की स्थापना की है। यह लैब आने वाले दिनों में दूसरी बीमारियों के इलाज में भी मदद करेगी। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में पीजीआई ने निजी और सरकारी मेडिकल कॉलेजों को इस कार्य में मदद की है। कोरोना संक्रमण के शुरुआती दौर में मॉलीक्यूलर लैब की कमी थी।
यह पीजीआई के लिए बड़ी चुनौती थी। इसके बावजूद डिपार्टमेंट ऑफ वायरोलॉजी ने इस चुनौती को स्वीकार किया और 50 कोविड मॉलीक्यूलर लैब स्थापित की। निदेशक प्रो. जगतराम ने इस उपलब्धि के लिए वायरोलॉजी डिपार्टमेंट की सराहना की है। उन्होंने कहा कि कोरोना के खिलाफ अभी तक संघर्ष सफल रहा है।
170 फेकल्टी और टेक्निकल स्टाफ को प्रशिक्षण
पीजीआई के वायरोलॉजी डिपार्टमेंट की प्रोफेसर डॉ. मिनी पी सिंह ने बताया कि 50 कोविड 19 मॉलीक्यूलर लैब को ऑपरेट करने के लिए 170 फेकल्टी और टेक्निकल स्टाफ को प्रशिक्षित किया गया है। अब वे इस क्रम को आगे बढ़ाते हुए हेल्थ वर्करों को समय-समय पर प्रशिक्षण देते रहेंगे। ये सभी 50 कोविड 19 मॉलीक्यूलर लैब रियल टाइम पीसीआर लैब टेस्टिंग करेंगी।
यहां-यहां स्थापित की गई लैब
प्रो. मिनी पी सिंह ने बताया कि उत्तर भारत में पीजीआई चंडीगढ़ ने पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड और लेह लद्दाख में ये 50 कोविड 19 मॉलीक्यूलर लैब स्थापित की हैं ताकि कोरोना महामारी के बीच मरीजों की रियल टाइम पीसीआर टेस्टिंग कर उन्हें इलाज मुहैया कराया जा सके। इसके साथ कोरोना के बढ़ते संक्रमण को रोका जा सके।
उत्तर भारत के इन राज्यों में 16 गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, 8 गवर्नमेंट सिविल अस्पताल, 11 प्राइवेट मेडिकल कॉलेज, सात डिफेंस लैब और चार स्टेट टेस्टिंग लैब खोली गई। इसमें आईआईसीईआर मोहाली की डीबीटी लैब, लुधियाना की जीएडीवीएएसयू, जालंधर की एनआरडीडीएल, पंजाब की बॉयोटेक्नोलॉजी इंक्यूबेटर और सेंट्रल फॉरेंसिक लैबोरेटरी मोहाली की लैब भी शामिल हैं।