कोरोना वायरस का संक्रमण सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार और गले में खराश जैसे लक्षणों से काफी आगे निकल चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी शिकायत भी कोरोना संक्रमण का लक्षण हो सकता है। ऐसी स्थिति में जरूरी है कि लक्षणों को नजरअंदाज किए बिना तत्काल कोरोना की जांच कराई जाए।
पीजीआई के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी डिपार्टमेंट की प्रो. ऊषा दत्ता ने बताया कि कोरोना का संक्रमण धीरे-धीरे शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित करने लगा है। पेट में दर्द, उल्टी, दस्त जैसी शिकायत में भी कोरोना की जांच पॉजिटिव आने लगी है। ऐसी स्थिति में बड़ों, बच्चों और बुजुर्गों को इसे लेकर सावधान रहने की जरूरत है।
दर्द की दवा न लें, करें घरेलू उपचार
डॉ. ऊषा ने बताया कि पेट की आंतों से संबंधित किसी भी तरह की परेशानी होने पर तत्काल डॉक्टर की सलाह लेनी जरूरी है। इसके अलावा हल्का भोजन करें, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले घरेलू उपचारों को प्राथमिकता दें। हल्दी और अन्य आयुर्वेदिक औषधियों का प्रयोग सावधानी से करें। ज्यादा तेल मसाले वाले भोजन का सेवन न करें। दर्द की दवा का सेवन बिना चिकित्सक के परामर्श से न करें।
पब्लिक शौचालय का सावधानी से करें प्रयोग
डॉ. ऊषा ने बताया कि कोरोना से बचाव के लिए घर के साथ बाहर प्रयोग की जाने वाली चीजों को लेकर भी सावधान रहना जरूरी है। खासतौर पर पब्लिक शौचालय प्रयोग करते वक्त सावधान रहना बहुत जरूरी है। इसके अलावा घर के शौचालय, वाश बेसिन, पॉट, नल, फर्श इन सबकी सफाई प्रतिदिन हाइपोक्लोराइट 0.5 के घोल या साबुन से की जानी चाहिए। डॉ. ऊषा ने बताया कि कोरोना कहीं भी हो सकता है, इसलिए हर स्तर के बचाव के उपाय होने चाहिए।
बच्चों पर रखें खास नजर
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विक्रम का कहना है कि कोरोना संक्रमण के लक्षण धीरे-धीरे शरीर के कई अंगों पर दिखने लगे हैं। ऐसी स्थिति में बच्चों पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। बच्चों में उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी शिकायतों को नजरअंदाज करने की भूल नहीं करनी चाहिए। इस समय इस तरह के लक्षण उन्हें कोरोना की चपेट में ला सकते हैं, इसलिए ऐसी शिकायत करने पर बच्चे को तत्काल डॉक्टर को दिखाएं। अगर डॉक्टर कोरोना टेस्ट की सलाह दे तो बिना देरी किए जांच कराएं। बुखार और खांसी के लक्षण को ही कोरोना मानकर बच्चों की अन्य समस्याओं को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।