केमिस्ट शॉप को अलॉट करने के लिए पीजीआई के पास दो फार्मूले हैं लेकिन दोनों ही मरीजों पर भारी पड़ रहे हैं। पहले फार्मूले के तहत पीजीआई ने जनवरी 2014 में ब्रांडेड दवाओं पर 57.2 प्रतिशत डिस्काउंट देने की शर्त पर एक दुकान अलॉट की थी।
शर्त के मुताबिक दुकानदार को 8 हजार रुपये महीना किराया देना था और सभी ब्रांडेड दवाओं पर 57.2 प्रतिशत छूट देनी थी। दुकान को अलॉट किए पूरे पांच-छह महीने बीत गए हैं, लेकिन अब तक दुकानदार पूरा स्टॉक नहीं रख पाया है।
अधिकतर मरीज शॉप से मायूस होकर लौटते हैं। पीजीआई के डायरेक्टर सहित कई लोगों को शिकायत दी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक पीजीआई का एडमिनिस्ट्रेशन इस डिस्काउंट को लागू नहीं करवा पाया है।
दूसरा फार्मूला से भी राहत नहीं
दूसरे फार्मूले में टेंडर के तहत राशि भरकर शॉप लेनी होती है। इसमें पीजीआई की तरफ से शर्त होती है कि कम से कम 15 से 30 प्रतिशत न्यूनतम डिस्काउंट देना ही होगा। यदि उससे ऊपर कोई डिस्काउंट देता है तो वह उसकी मर्जी है।
केमिस्ट शॉप तो छूट तो देते हैं, लेकिन उसमें भी गड़बड़ी की जाती है। जांच में यह भी सामने आया है कि जिस रेट पर पीजीआई में दवा मिलती है, उससे काफी सस्ते रेट पर दवाएं बाजारों में उपलब्ध है।
पीजीआई में केमिस्ट शॉप के हर साल रेंट बढ़ रहे हैं। इसी दर से दवाओं की एमआरपी भी बढ़ रही है। दवाओं के दाम हर साल 30-40 प्रतिशत की दर से बढ़ाए जा रहे हैं। यानी बढ़ते किराये की वसूली भी मरीजों से ही की जा रही है।
पीजीआई के पांच दुकानों के नए टेंडर
यहां पर दुकान है-------------पुराना किराया------नया किराया
एडवांस पीडियाट्रिक------------505483--------1135959
ओपीडी (दो दुकाने)------1256029, 930696---4807434
नेहरू ब्लाक------------------3398057--------4977307
नेहरू ब्लाक------------------2216532---------3853707
ओल्ड शापिंग कांप्लेक्स---------105300----------1731573