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उत्तर भारत के लिए Chandigarh PGI वरदान: जान बचानी हो तो जुबान पर सबसे पहले आता है पीजीआई का नाम

Mon, 08 Jul 2024 09:05 PM IST
अंकेश ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

उत्तर भारत के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में से एक पीजीआई चंडीगढ़ मरीजों के लिए वरदान साबित हो रहा है। पीजीआई में रोजाना 10 हजार से ज्यादा मरीज इलाज के लिए आते हैं। मरीजों का विश्वास ही है जो वे पीजीआई में इलाज करवाते हैं। 
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चंडीगढ़ पीजीआई - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंडीगढ़ के आस-पास के सात प्रदेशों में अनगिनत नए मेडिकल कॉलेज और निजी अस्पताल बन चुके हैं। लेकिन, आज भी जब कोई बीमार पड़ता है तो सबसे पहले जुबान पर जान बचाने के लिए पीजीआई का ही नाम आता है। पीजीआई का एल्युमनाई होने के नाते यह मेरे लिए गर्व की बात है। इसलिए पीजीआई को लाइट ऑफ नॉलेज है। यहां से निकलने वाले डॉक्टर उत्कृष्ट होते हैं। एक डॉक्टर में मरीजों की सेवा में समर्पण और निस्वार्थता होनी चाहिए। ये गुण पीजीआई में हर जगह देखने को मिलता है। यह बातें सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा के महानिदेशक ले. जनरल दलजीत सिंह ने पीजीआई के 61वें स्थापना दिवस समारोह में मंगलवार को बतौर मुख्य अतिथि कहीं।
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उन्होंने चिकित्सा और राष्ट्र थीम पर विचार व्यक्त कर डॉक्टरों में उर्जा का संचार किया। इस अवसर पर उन्होंने हाल ही में आयोजित वीरता पुरस्कार 2024 का एक भावनात्मक विवरण सुनाते हुए कहा कि जमे हुए उपकरणों से लेकर दुर्गम सड़कों तक, चरम स्थितियों का सामना करते हुए हमारे चिकित्सा कर्मी हर मिशन में करुणा का परिचय देते हुए अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान देने को सीमा तक डटे रहते हैं। इसलिए हमें अपनी मातृभूमि के उत्थान के लिए प्रयास करना चाहिए। उन्होंने डॉक्टरों से कहा कि पीजीआई के संस्थापकों की विरासत का सम्मान करना चाहिए।

जीवन में अपना रास्ता स्वयं चुने
दलजीत सिंह ने कहा कि दूसरों के रास्ते पर चलने की बजाय जीवन में अपना रास्ता स्वयं चुनने का जज्बा होना बेहद जरूरी है। राष्ट्र से जुड़े होने की भावना महत्वपूर्ण है। उन्होंने सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं की सराहना की और कहा कि कठोर सैन्य कार्यक्रमों के माध्यम से विशिष्ट क्षेत्रों में प्रशिक्षित हमारे डॉक्टर प्रत्येक रोगी के लिए विशेषज्ञता और समर्पण लाते हैं। देखभाल के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करते हैं। शांति और संकट दोनों समय में हमारी टीमें अटूट संकल्प के साथ तैयार रहती हैं। उग्रवाद या प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए तेजी से तैनात होती हैं।
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लेफ्टिनेंट जनरल दलजीत सिंह को सम्मानित करते पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल। - फोटो : अमर उजाला
मरीजों के विश्वास के आगे झुकता है सिर
कार्यक्रम में पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं की सरहाना की और कहा कि यह सौभाग्य की बात है कि मुख्य अतिथि ने सभी को फौज के हिडेन रूप से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि फौजी डॉक्टरों के बलिदान के बारे में सुनकर वाकई सिर नमन में झुक गया। उन्होंने कहा कि फौज की वर्दी में पीजीआई के पूर्व छात्र का मुख्य अतिथि के रूप में स्थापना दिवस के अवसर पर आना हमारे लिए गौरव की बात है। क्योंकि उनके शरीर पर फौज की वर्दी और दिल में पीजीआई है। जहां तक मरीजों के दबाव की बात है तो मरीजों के आगे हमारा सिर झुकता है। मरीजाें के विश्वास के आगे हम नतमस्तक हैं। सितंबर के अंत तक न्यूरोसाइंस सेंटर जनता को समर्पित कर दिया जाएगा। इस अवसर पर संस्थान के तीस कर्मचारियों को उनकी उत्कृष्ट सेवा के लिए सम्मानित किया गया।
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