हरियाणा सिविल सर्विस (एचसीएस) भर्ती प्रक्रिया के दौरान कठोर मानदंडों का हवाला देते हुए इसे चुनौती देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार, हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) व अन्य को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए हिसार निवासी अशोक कुमार व अन्य ने एडवाेकेट पृथ्वीराज यादव के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि 2022 में हरियाणा पब्लिक सर्विस कमिशन ने एचसीएस के 100 पदों के लिए आवेदन मांगे थे। इसके लिए शर्त यह थी कि सभी विषयों में कुल मिलाकर 45 प्रतिशत अंक अनिवार्य थे। कुल प्रश्नों के 10 प्रतिशत से अधिक का जवाब न देने वालों को अयोग्य करार देने का प्रावधान था।
याची ने बताया कि इन कठोर मानदंडों के चलते 2022 की भर्ती में केवल 61 लोगों का ही चयन हो सका। याची ने बताया कि भर्ती के दौरान आरक्षित वर्ग के लोगों के लिए छूट का प्रावधान नहीं किया गया जो गलत है। आरक्षित वर्ग का प्रतिनिधित्व हो इसके लिए यूपीएससी इस वर्ग के आवेदकों के पद खाली रह जाने पर मानकों में छूट दे देती है लेकिन एचपीएससी को ऐसा कोई अधिकार तक नहीं दिया गया है।
याची ने बताया कि पिछली भर्ती को लेकर हाईकोर्ट में याचिका विचाराधीन है और कुल पद नहीं भरे जा सके थे और अब इन्हीं कठोर मानदंडों के साथ नवंबर 2023 में एचपीएससी ने एचसीएस की नई भर्ती निकाल दी।
याची ने हाईकोर्ट से अपील की है कि आरक्षित वर्ग को कार्यपालिका में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो इसके लिए हाईकोर्ट आवश्यक आदेश जारी करे। हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलें सुनने के बाद याचिका पर सरकार व एचपीएससी को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि भर्ती का परिणाम इस याचिका पर आने वाले फैसले पर निर्भर होगा।