फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kisan Andolan: किसानों को रोकने के लिए सड़कों पर बनाए अवरोध के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील, मंगलवार को सुनवाई

Mon, 12 Feb 2024 06:55 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

अपनी मांगों के लिए किसानों ने 13 फरवरी को दिल्ली कूच का एलान किया हुआ है। उन्हें रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए बताया कि शीर्ष अदालत ने माना है कि विरोध प्रदर्शन के लिए सार्वजनिक मार्गों पर कब्जा स्वीकार्य नहीं है, और प्रशासन को सार्वजनिक मार्ग को अतिक्रमण या अवरोधों से मुक्त रखना चाहिए। इस मामले में तो सरकार ही मार्गों को बाधित कर रही है।
विज्ञापन
किसानों आंदोलन को लेकर रास्ता बंद - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

किसान आंदोलन का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। किसानों की दिल्ली की ओर कूच रोकने के लिए सरकार द्वारा पैदा किए जा रहे अवरोध के खिलाफ पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। 
विज्ञापन




पंचकूला निवासी उदय प्रताप सिंह ने याचिका में गृह मंत्रालय, पंजाब सरकार, हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन को प्रतिवादी को बनाया है। याचिका पर मंगलवार की सुबह कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की बेंच सुनवाई करेगी।

याचिका में हाईकोर्ट को बताया गया कि किसानों को रोकने के लिए हरियाणा व पंजाब की सीमा को सील किया जा रहा है। खास तौर पर अंबाला के पास शंभू में बड़े स्तर पर अवरोध व सुरक्षा बल तैनात किए जा रहे है। याची ने कहा कि किसानों का आंदोलन शांतिपूर्वक संपन्न करने का आह्वान है और अभी तक भी वे शांतिपूर्वक विरोध कर रहे है। 
विज्ञापन


याचिका में कहा गया कि सड़क पर कील लगाना, कंक्रीट की दीवारों को अवरोध बनाना, करंट और कांटेदार तार की बाड़ जैसे अवरोध पैदा करना आदि कानून के शासन द्वारा शासित लोकतांत्रिक समाज की नींव को कमजोर करता है। लोकतांत्रिक समाज में मानवता के लिए सम्मान होता है और अधिकार और कानूनी सिद्धांत प्रबल होने चाहिए।

याचिका में कहा गया है कि अंबाला, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद , हिसार, फतेहाबाद और सिरसा जैसे कई जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं और बल्क एसएमएस को निलंबित करने सहित हरियाणा के अधिकारियों की कार्रवाई ने स्थिति को और खराब कर दिया है। लोगों को सूचना और संचार के अधिकार से वंचित कर दिया गया है। सड़क की नाकाबंदी से न केवल लोगों को असुविधा होती है, बल्कि एम्बुलेंस, स्कूल बसों, पैदल यात्रियों और अन्य वाहनों की आवाजाही भी बाधित होती है। इस रुकावट के परिणामस्वरूप वैकल्पिक मार्गों पर यातायात बढ़ गया है, जिससे यात्रियों के लिए देरी और कठिनाइयां पैदा हो रही हैं। इससे न केवल आमजन बल्कि वकील, डॉक्टर और आपातकालीन सेवाएं देने वाले पेशेवर भी प्रभावित हो रहे हैं। इन पेशेवरों को अपने कार्यस्थलों तक पहुंचने और मरीजों की तुरंत देखभाल करने में समस्या आ रही है। 

याचिका के अनुसार कई जिलों जिलों में सीआरपीसी की धारा 144 लागू करने के साथ-साथ विभिन्न सड़कों पर सीमेंट बैरिकेड्स, स्पाइक स्ट्रिप्स और अन्य बाधाएं लगाना राज्य के अधिकारियों द्वारा किसी के विरोध करने के अधिकार को दबाने का प्रयास को दर्शाता है। जो लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के खिलाफ है। जनहित याचिका में तर्क दिया गया है कि पुलिस द्वारा बलों के अनुचित उपयोग और डराने-धमकाने की रणनीति के साथ इस तरह की कार्रवाई न केवल मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है, बल्कि लोकतंत्र और कानून के शासन के सिद्धांतों को भी कमजोर करती है। इस याचिका पर हाईकोर्ट मंगलवार को सुनवाई करेगा।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें