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Haryana News: कृषि क्षेत्र में औद्योगिक कालोनी बनाने की मिलेगी अनुमति, संशोधित नीति जारी

Wed, 02 Aug 2023 02:15 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

नियमानुसार उद्योग विकसित करने के लिए नीति में संशोधन करते हुए कृषि क्षेत्र में औद्योगिक कालोनी या व्यक्तिगत तौर पर औद्योगिक इकाई लगाने की अनुमति दी है। औद्योगिक कालोनी में कम से कम 10 उद्योग एक जगह लगाए जाने अनिवार्य होंगे।
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विस्तार
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हरियाणा में शहरों के निकट नियंत्रित क्षेत्र से बाहर कृषि क्षेत्र में उद्योग स्थापित करने के इच्छुक लोगों के लिए अच्छी खबर है। अब सरकार ने कृषि क्षेत्र में उद्योगों की स्थापना के लिए भूमि के प्रयोग परिवर्तन प्रमाण पत्र देने की अनुमति देने का फैसला लिया है। इसके लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की नीति में संशोधन किया है। इसमें औद्योगिक कालोनी के लिए व व्यक्तिगत तौर पर उद्योग लगाने के लिए अलग-अलग नियम तय किए हैं।

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विभाग की ओर से जारी नीति के अनुसार अब तक शहर के नियंत्रित क्षेत्र से बाहर कृषि क्षेत्र में उद्योग स्थापित करने के लिए भूमि प्रयोग का परिवर्तन प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाता था। इससे लोगों को काफी परेशानी होती है और इस क्षेत्र में अलग-अलग जगह औद्योगिक इकाइयां बिखरी हुई हैं। इस क्षेत्र में नियमानुसार उद्योग विकसित करने के लिए नीति में संशोधन करते हुए कृषि क्षेत्र में औद्योगिक कालोनी या व्यक्तिगत तौर पर औद्योगिक इकाई लगाने की अनुमति दी है। औद्योगिक कालोनी में कम से कम 10 उद्योग एक जगह लगाए जाने अनिवार्य होंगे।

नीति के अनुसार हाइपर जोन में कम से कम पांच व अधिकतम 25 एकड़, व्यक्तिगत के लिए आधा एकड़, हाई जोन एक व दो में कम से कम पांच व अधिकतम 20 एकड़ व व्यक्तिगत के लिए आधा एकड़, मीडियम क्षेत्र के लिए कम से कम दो एकड़ व अधिकतम 15 एकड़ व व्यक्तिगत के लिए इस वर्ग में 0.2 एकड़ में उद्योग लगाना होगा। 

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वहीं सबसे कम महत्व वाले जोन में कम से कम दो व अधिकतम 10 एकड़ में व व्यक्तिगत तौर पर 0.2 एकड़ जमीन होनी चाहिए। संशोधित नीति में रास्ते, प्रदूषण को लेकर उद्योगों की श्रेणियों, निर्धारित फीस, जमीन के मालिकों की संख्या, धरोहर राशि सहित कई तरह की नियमों के बारे में स्थिति स्पष्ट की गई है।

मानेसर औद्योगिक मॉडल टाउनशिप : नो लिटिगेशन पालिसी-2023 की अधिसूचना जारी

हरियाणा सरकार ने मानेसर औद्योगिक मॉडल टाउनशिप विस्तार के लिए नो लिटिगेशन पॉलिसी 2023 की अधिसूचना जारी कर दी है। एचएसएसआईडीसी के एमडी डॉ. यश गर्ग ने यह अधिसूचना जारी की है। इस नीति का लाभ उन भूमि मालिकों को मिलेगा जिनकी भूमि 10 जनवरी 2011 को अनिवार्य अधिग्रहण के लिए अधिसूचित की गई थी।

हरियाणा कैबिनेट ने 7 जुलाई को नो लिटिगेशन पॉलिसी 2023 को मंजूरी दी थी। इसमें गुरुग्राम मानेसर के कसान, कुकरोला गांवों की राजस्व संपत्ति में औद्योगिक मॉडल टाउनशिप के लिए आनुपातिक आधार पर एक एकड़ भूमि के अधिग्रहण के बदले भूस्वामियों को एक हजार वर्ग मीटर के बराबर विकसित आवासीय या विकसित औद्योगिक भूखंड प्राप्त करने का अधिकार होगा, जो भूमि मालिक नो लिटिगेशन पॉलिसी 2023 के तहत विकल्प नहीं चुनते हैं, वे भूमि मालिकों के लिए पुनर्वास और पुनर्स्थापन और भूमि अधिग्रहण विस्थापित नीति (आर एंड आर) के तहत लाभांवित होंगे।
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किसानों को इसकी अधिसूचना और पोर्टल के लांच से छह महीने की अवधि के भीतर योजना का विकल्प चुनने का अधिकार होगा। भूमि मालिकों को तत्काल लाभ सुनिश्चित करने के लिए एचएसआईआईडीसी योजना के बंद होने से तीन महीने की अवधि के भीतर भूमि मालिकों के आवंटन हिस्से के आधार पर आवासीय या औद्योगिक क्षेत्र को विकसित करने का आश्वसन देते हुए भूमि पात्रता प्रमाण पत्र जारी कर सकता है। योजना में शामिल होने के लिए भू मालिको को अंडरटेकिंग देनी होगी कि वह अदालत में चल रहे केस वापस ले लेंगे और इस योजना का लाभ लेने के बाद दोबारा इसे चैलेंज नहीं करेंगे।

1810 एकड़ जमीन की थी अधिगृहत

राज्य सरकार ने मानेसर औद्योगिक मॉडल टाउनशिप विस्तार के विकास के उद्देश्य से 10 जनवरी, 2011 को भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 4 के तहत जिला गुरुग्राम की मानेसर तहसील के गांवों कासन, कुकरोला और सेहरावां में लगभग 1810 एकड़ जमीन को अधिसूचित किया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने 25 अप्रैल, 2011 के आदेश के तहत इस अधिग्रहण कार्रवाई पर रोक लगा दी। 

न्यायालय द्वारा दिया गया स्टे 2 दिसंबर, 2019 को हटा दिया गया और उसके बाद उक्त भूमि को 17 अगस्त, 2020 को भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 6 के तहत अधिसूचित किया गया और बाद में 8 अगस्त, 2022 को अवार्ड की घोषणा की गई थी। हालांकि, इससे संतुष्ट नहीं थे और मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मुआवजा बढ़ाने की मांग की थी।
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