बढ़ रहे वायु और ध्वनि प्रदूषण को देखते हुए चंडीगढ़ पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी ने स्कूल और कोचिंग संस्थान पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है।
इसके लिए कमेटी अक्टूबर में टीम गठित कर सर्वे करवाएगी कि कितनी शिक्षण संस्थानों में कितने जनरेटर चल रहे हैं। जनरेटर संचालन के लिए कितने शिक्षण संस्थानों ने परमिशन ली है। शिक्षण संस्थान को जनरेटर सेट चलाने के लिए परमिशन लेनी होगी।
शहर के प्राइवेट स्कूलों और कोचिंग शिक्षण संस्थान को बिना एनओसी के जनरेटर सेट चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके लिए चंडीगढ़ के सेक्टर -17, 34, सहित पूरे शहर में सर्वे किया जाएगा। शहर में ध्वनि और वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है।
इसके चलते पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी ने यह कदम उठाने का फैसला किया है। शहर के 90 प्राइवेट स्कूल अगर जनरेटर चलाने के लिए एनओसी नहीं लेंगे तो इन्हें सील किया जाएगा। शहर में आरएसपीएम की आदर्श मात्रा 60 माइक्रो ग्राम क्यूबिक मीटर होनी चाहिए। लेकिन यह 130 माइक्रो ग्राम क्यूबिक मीटर है।
वहीं ध्वनि प्रदूषण की नियंत्रित मात्रा 40 डेसीबल होनी चाहिए। लेकिन ध्वनि प्रदूषण शहर में 60 डेसीबल पहुंच गया है। चंडीगढ़ पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी के मेंबर सेक्रेटरी एवं आईएफएस बीरेंद्र चौधरी ने बताया कि शहर में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए यह फैसला किया गया है।