तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के बाद अस्तित्व में आई संयुक्त संघर्ष पार्टी का प्रदर्शन पंजाब विधानसभा चुनाव में बेहद लचर रहा है। पहले सियासी इम्तिहान में ही पार्टी औंधे मुंह गिरी है। भाकियू चढूनी के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने इस पार्टी की नींव रखकर पंजाब चुनाव में ताल ठोकी थी।
चढूनी किसान आंदोलन में मिली लोकप्रियता को देखते हुए पंजाब में बिना जमीन भांपे ही चुनावी रण में उतर गए, जिससे उन्हें सीधा नुकसान उठाना पड़ा। पंजाब में उनकी पार्टी अपना प्रभाव छोड़ने में पूरी तरह नाकाम रही है। इसका उनकी किसान नेता की छवि पर भी असर पड़ेगा।
किसान आंदोलन जिन मांगों पर सहमति के साथ खत्म हुआ था, वे अभी तक पूरी नहीं हो पाई हैं। ऐसे में दोबारा किसान आंदोलन शुरू करने पर कितना जनसमर्थन मिल पाएगा, इस पर भी नजरें टिकी रहेंगी। चूंकि, लोगों के सामने अब आ चुका है कि किसान नेताओं के सियासी हित भी हैं। ऐसे में गुरनाम सिंह चढूनी को अब फूंक-फूंक कर कदम रखने होंगे।
सीट उम्मीदवार वोट