हालात ऐसे हैं कि खेतों में लगे ट्यूबवेल काला पानी उगल रहे हैं। मजबूरी में किसान इसी से अपनी फसलों की सिंचाई कर रहे हैं। सरकार और प्रशासन की लापरवाही के कारण इसी पानी का इस्तेमाल पीने में भी कर रहे हैं।
ट्यूबवेल से निकल रहा जहरीला पानी
इंडस्ट्री से छोड़ा जा रहा केमिकल युक्त जहरीला पानी बंद करवाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे गांव बबनपुर के रहने वाले जगतार सिंह तारी ने बताया कि गांव बबनपुर और आसपास करीब दो किलोमीटर का क्षेत्र करीब 10 साल से दूषित पानी की समस्या से जूझ रहा है। ट्यूबवेल भी दूषित पानी उगल रहे हैं। किसान इसी पानी का इस्तेमाल सिंचाई में करते हैं।
उन्होंने केमिकल युक्त पानी पर रोक लगाने की शिकायत नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक की। ग्रामीण चंदा इकट्ठा कर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि नियमों के मुताबिक जिस क्षेत्र में इंडस्ट्री लगी होती है, वहां आसपास के खेतों में फसलों की सिंचाई के लिए आधा पानी नहर से मुहैया करवाया जाता है लेकिन दुख की बात है कि उनके खेतों से करीब एक किलोमीटर पर स्थित बबनपुर नहर से उन्हें एक बूंद पानी नसीब नहीं हो रहा।
जगतार सिंह तारी, अमनदीप सिंह और लखविंदर सिंह।
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20 साल पहले यहां के पानी की होती थी प्रशंसा
गांव के ही नौजवान अमनदीप सिंह ने बताया कि करीब 20 साल पहले जब उनकी रिश्तेदारी से कोई आता था तो वह गांव के मीठे पानी की प्रशंसा करते नहीं थकते थे और कहते थे कि इससे अच्छा पीने का पानी कहीं और नहीं है लेकिन अब यह मीठा पानी बेहद दूषित हो चुका है। पशुओं के भी पीने योग्य नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उनके गांव का पानी इतना शुद्ध था कि अगर यह इंडस्ट्री न होती तो करीब 50 साल तक गांव में किसी घर में आरओ सिस्टम लगाने की जरूरत न पड़ती। पानी के दूषित होने के कारण अमीर घरानों ने तो गहरे बोर करवाकर अपने घरों में आरओ लगवा लिया लेकिन गरीब क्या करें और कहां जाएं। रोजाना कोई अपने घर से उन्हें पानी भी भरने नहीं देता।
कैंसर से मरने वाले 20 लोगों के नाम सौंप चुके हैं, कैंप लगे तो और मरीज मिलेंगे
गांव के लखविंदर सिंह ने बताया कि सबसे अधिक परेशानी गरीब मजदूर परिवारों को झेलनी पड़ रही है। नतीजा यह है कि गांव में कैंसर की बीमारी फैल रही है और लोग उसकी चपेट में आ रहे हैं। कैंसर से मरने वाले गांव के 20 लोगों के नामों की सूची वह जिला प्रशासन को काफी समय पहले सौंप चुके हैं लेकिन प्रशासन ने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि गांव में मेडिकल कैंप लगना चाहिए, ताकि इस बात का पता चल सके कि गांव के कितने लोग कैंसर से ग्रस्त हैं। अब तक जितने भी लोग कैंसर से मरे हैं, उन्हें बीमारी की जानकारी तीसरे स्टेज पर मिली।
न प्रशासन सुन रहा है और न ही सरकार
गांव की चौपाल में जुटे तेजपाल मोहन, सुरिंदर सिंह, अजमेर सिंह, जगतार सिंह, अमन सिंह, दर्शन सिंह, नाजर सिंह ने बताया कि उनके गांव की न तो प्रशासन सुन रहा है और न ही सरकार के कानों तक उनकी आवाज पहुंच रही है। गांव का पानी दूषित होने की वजह से लोग मौत के मुंह में जा रहे हैं। लेकिन शुद्ध पानी मुहैया करवाने के लिए एक आरओ तक उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा।
ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। करीब डेढ़ साल पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने सांसद कार्यकाल के दौरान भरोसा दिया था कि उनकी समस्या का जल्द समाधान करवाया जाएगा और चुनाव से पहले भी उन्होंने यही आश्वासन दिया। उम्मीद है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान उनकी समस्या का जल्द समाधान करेंगे।
कई पत्र लिखे लेकिन जवाब नहीं आया
सरपंच महिंदर कौर ने कहा कि दूषित पानी की समस्या और सरकारी आरओ सिस्टम लगाने के बारे में संबंधित विभाग को कई बार पत्र लिखा लेकिन इसका कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने गांव में आरओ सिस्टम लगाने की मांग की, ताकि बीमारियों की चपेट में आ रहे ग्रामीणों को बचाया जा सके।