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बेबसी की तस्वीर: ट्रैक पर बैठे थे किसान, लाचार बेटे ने लगाई गुहार-बाऊ जी बीमार हैं, प्लीज जाने दो; लेकिन...

Mon, 11 Mar 2024 10:58 AM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर (पंजाब)

सार

किसानों ने रविवार को पंजाब में 52 जगह और हरियाणा में 3 जगह पर ट्रेनें रोकी थीं। दोपहर 12 बजे से लेकर चार बजे तक रेल रोको आंदोलन चलाया गया था। अमृतसर, लुधियाना, तरनतारन, होशियारपुर, फिरोजपुर, फाजिल्का, संगरूर, मानसा, मोगा और बठिंडा आदि जिलों से गुजरने वाली ट्रेनों के यात्रियों को ज्यादा परेशानी हुई।
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किसानों से गुहार लगाता युवक - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अपनी मांगों को लेकर किसानों ने रविवार को रेल रोको आंदोलन किया था। किसान पंजाब में 52 से अधिक जगह पर रेलवे ट्रैक पर बैठ गए थे। किसानों के प्रदर्शन के चलते पंजाब में 49 ट्रेनें प्रभावित हुईं, जबकि 9 ट्रेनों को रद्द करना पड़ा।

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दोपहर 12 बजे से लेकर दोपहर बाद चार बजे तक रेल रोको आंदोलन के चलते यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बेबस लोग किसानों से गुहार लगाते रहे लेकिन वे नहीं माने। ऐसा ही एक हृदयविदारक मामला जालंधर में सामने आया। 

किसानों के आंदोलन के कारण रेलवे स्टेशन पर रुकी ट्रेन में बैठे एक बेटे को हाथ में पोस्टर पकड़कर किसानों से गुहार लगानी पड़ी कि मेरे बाऊ जी बीमार हैं, उन्हें दिल्ली अस्पताल में दिखाना जरूरी है, प्लीज जाने दो। आशीष नाम का ये युवक अमृतसर से दिल्ली जा रहा था। ये फोटो सामने आने पर लोग भावुक हो गए, वहीं उनके किसानों के प्रति गुस्सा भी दिखाई दिया। 
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किसानों ने जालंधर कैंट के अलावा फिल्लौर व भोगपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेनें रोक दी थी, जिससे ट्रेन में सफर कर रहे लोगों को खासी परेशानी उठानी पड़ी है। अमृतसर से जालंधर आने वाली शताब्दी एक्सप्रेस और हमसफर एक्सप्रेस को भी जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन पर रोक दिया गया था। जालंधर कैंट में किसानों के रेलवे ट्रैक जाम करने से ट्रेन में बैठे यात्री परेशान हो रहे थे। 
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कैंट रेलवे स्टेशन पर ही जाम में फंसे राकेश कुमार का कहना है कि किसानों व सरकार की इस लड़ाई के बीच आम जनता पिस कर रह गई है। किसानों को लोगों की परेशानी को समझना चाहिए। इस तरह के जाम में कोई मरीज फंसा हो सकता, जिसकी जान जोखिम में आ सकती है। सरकार को भी इस समस्या का हल जल्द से जल्द निकालना चाहिए। उधर, किसानों का कहना है कि सरकार उनकी मांगों को अंदेखा कर रही है, जिसके कारण उन्हें मजबूर होकर सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।

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