पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज
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अगर उनके 60 फीसदी मारे जाने का अंदेशा है, तो चालीस फीसदी जिंदा होने की उम्मीद भी है। मैं उनके इस रूप की कायल हो गई। अपने काम के प्रति इतनी सकारात्मकता।
ऐसी सोच, कहां दिखती है। वह फैसले फटाफट लेती थीं। मुलाकात के दौरान सुषमा ने कहा था कि आपका परिवार 35 साल से पंजाब की सेवा में लगा है। उन्होंने मेरे पिता और माता की जमकर तारीफ की थी।
अमनजोत के मामले गंभीरता से लेना
अमनजोत ने बताया कि वह सुषमा स्वराज से तीन चार बार ही मिलीं, लेकिन हर मुलाकात यादगार रही। मैं अकसर विदेशों में फंसे लोगों के मामले में उनसे मिलती थी। ऐसे में सुषमा स्वराज ने सरकार के प्रिंसिपल सेक्रेटरी स्तर के एक अधिकारी की ड्यूटी लगा दी थी कि जब भी अमनजोत कौर कोई मामला लेकर आए तो उसे गंभीरता से लेकर तुरंत हल किया जाए।
39 भारतीयों में हिमाचल प्रदेश, पंजाब, बिहार, और केरल के रहने वाले भारतीय थे। इन 39 भारतीयों में अमृतसर और तरनतारन जिलों के आठ लोग थे। भारतीयों की तलाश करने में सुषमा स्वराज ने खाड़ी के सभी देशों में स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों व वहां की सरकारों के साथ निरंतर संपर्क बनाये रखा था।
मारे गए भारतीयों के शवों को वतन लाने के लिए भी सुषमा स्वराज ने तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री जरनल वीके सिंह को इराक भेजा था। जरनल वीके सिंह शवों के साथ अमृतसर के श्री गुरु रामदास जी इंटरनेशनल एयरपोर्ट में पहुंचे थे। एयरपोर्ट से शवों को कड़ी सुरक्षा के बीच उनके घरों में भेजा गया था।
अमर उजाला से बातचीत करते हुए मजीठा विधान सभा हलके के गांव भोये के मारे गए मनजिंदर सिंह की बहन गुरबिंदर कौर ने बताया की जब पहली बार सुषमा स्वराज से दिल्ली स्थित उनके निवास स्थान पर केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर के साथ मिली थीं। उनके साथ वह सभी परिवारों के सदस्य थे, जिनके बच्चे मोसुल में मारे गए थे।
उसने जब अपने व इन परिवारों की व्यथा के बारे में सुषमा को बताया था, तब भीतर तक एहसास हो गया था कि वह उसके भाई सहित शेष सभी लापता नौजवानो को ढूंढने के लिए गंभीर है।
मोसुल में आईएसआईएस के आतंकियों ने गांव मानोचाहल की बलविंदर कौर के बेटे रंजीत सिंह की भी हत्या कर दी थी। बलविंदर कौर भी सुषमा स्वराज से मिलने के लिए जाती रही हैं। उन्होंने कहा की आईएसआईएस ने उनके बेटे सहित कई नौजवानो की हत्या कर लाशों को रेगिस्तान में फेंका दिया था। उनके शव गल-सड़ गए थे। डीएनए टेस्ट के बाद उनके बेटे की कुछ अस्थियां घर आई थीं। यह सुषमा स्वराज के कारण संभव हो सका था।
सुषमा ने सरबजीत की रिहाई का हरसंभव प्रयास किया: दलबीर कौर
पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में मारे गए सरबजीत सिंह की बहन बीबी दलबीर कौर ने पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ जुड़ी यादों के पन्ने खंगालते हुए भावुक हो गईं। अमर उजाला से टेलीफोन से बातचीत करते हुए बीबी दलबीर कौर ने कहा की उन्होंने सरबजीत को रिहा करवाने में हर संभव कोशिश की थी।
सरबजीत की रिहाई के लिए उन्होंने प्रत्येक इंटरनेशनल प्लेटफार्म पर जोरदार ढंग से आवाज उठायी थी। उनकी मौत का समाचार सुन कर पहले यकीन ही नहीं हुआ। जब भी वह सरबजीत की रिहाई को लेकर उनसे मिली, वह उनसे पंजाबी में बात करतीं। उनसे बातचीत करते हुए कभी भी महसूस नहीं की वह एक नेता से बातचीत कर रही हैं। सुषमा ने सदैव इस बात का एहसास करवाया जैसे वह उनकी बहन हों। उन्होंने जब भी सुषमा से बातचीत की, वह हंस कर बोलती थीं।