इसी बीच बार को संबोधित करते हुए बार एसोसिएशन के प्रधान दयाल प्रताप सिंह रंधावा ने कहा कि ट्रिब्यूनल और कमीशन से लोकतंत्र को खतरा है। सरकार हाईकोर्ट की पावर को कम करना चाहती है, इसलिए ट्रिब्यूनल और कमीशन बना देती है ताकि सरकार से जुड़े मामले हाईकोर्ट न पहुंचें और उन्हें निचले लेवल पर ही रफा दफा कर दिया जाए।
ओपन लेटर रहा सुर्खियों में
बुधवार सुबह हाईकोर्ट के एक सीनियर एडवोकेट के नाम से ओपन लेटर सुर्खियों में आ गया। इस लेटर में सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। उसमें लिखा गया था कि 5 अगस्त को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की बैठक को गुप्ता ने हाइजेक कर लिया और अन्य किसी को उसका पक्ष रखने का मौका नहीं दिया।
यह ओपन लेटर व्हाट्सएप के जरिये वकीलों को सर्कुलेट किया गया। इस ओपन लेटर पर बार के कई वकीलों ने आपत्ति जताई और दोपहर तक कुछ युवा एडवोकेट्स ने भी ओपन लेटर के जवाब में अपना एक लेटर जारी कर सभी आरोपों को खारिज कर दिया। इस जवाबी पत्र में कहा गया कि सभी वकील अनुपम गुप्ता के साथ हैं।
रोष प्रदर्शन में सीनियर एडवोकेट शामिल
सीनियर एडवोकेट आरएस चीमा, अनु चतरथ, एसडी शर्मा, आनंद छिब्बर आदि ने वकीलों के धरना प्रदर्शन का समर्थन किया और बार को संबोधित किया। उनके अतिरिक्त बार काउंसिल के पूर्व चेयरमैन रजत गौतम, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य प्रताप सिंह ने वकीलों को संबोधित किया और हैट को सिरे से नामंजूर करते हुए सरकार से इस नोटिफिकेशन को वापस लिए जाने की अपील की। बुधवार को हाईकोर्ट के वकीलों के रोष प्रदर्शन को कुछ ट्रेड यूनियन, लेबर यूनियन और कर्मचारी संगठनों का भी साथ मिल गया।