पंजाब की सियासत में बड़ा फेरबदल। पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब का विलय कांग्रेस में हो गया है। इसके साथ ही मनप्रीत बादल ने कांग्रेस को ज्वॉइन कर लिया। पीपीपी सुप्रीमो मनप्रीत बादल ने बताया कि पार्टी नेताओं से सलाह-मशविरा करने के बाद ही उन्होंने मर्जर पर फैसला किया।
जानकारी के मुताबिक प्रदेश कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पदभार संभालते ही पंजाब में भी बिहार की तरह महागठबंधन बनाने का ऐलान किया था। इसे लेकर कैप्टन और मनप्रीत की बात भी हो चुकी थी। इसके बाद मनप्रीत पीपीपी के स्तर पर पिछले दिनों से मनप्रीत पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर रहे थे।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले मनप्रीत ने कहा था कि कांग्रेस को पीपीपी के एजेंडे के प्रति गंभीर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पीपीपी बादल सरकार के वीआईपी कल्चर के खिलाफ है। लोगों से जुड़े मुद्दों पर भी पार्टी का एक एजेंडा है। वर्करों की भावनाएं भी हैं। इन सभी बातों पर विचार चल रहा है।
2012 में कैप्टन थे खिलाफ
मनप्रीत बादल 2012 के विधानसभा चुनाव में ही कांग्रेस के साथ मिल कर लड़ना चाहते थे। उन्होंने इसके लिए कोशिश भी की थी। पर तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह इसके लिए तैयार नहीं थे। इसका खामियाजा दोनों पार्टियों को भुगतना पड़ा। पीपीपी करीब पांच फीसदी वोट ले गई, सीट कोई नहीं मिली। कांग्रेस को कई सीटें गंवानी पड़ी।