यूटी प्रशासन ने इस साल शहर के लोगों को राहत देते हुए कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी न करने का फैसला लिया है। पिछले तीन सालों से लगातार कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी हो रही है। पिछले साल रेजिडेंशियल के साथ-साथ कामर्शियल प्रॉपर्टी के कलेक्टर रेट में 50 फीसदी तक बढ़ोतरी की थी जिसका व्यापारियों और शहर के आम लोगों ने विरोध किया था। मार्केट और कलेक्टर रेट में अंतर को कम करने के लिए ही पिछले साल ज्यादा रेट बढ़ाए गए थे। वहीं 2012 में कलेक्टर रेट में 10 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई थी।
82368 रुपये प्रति वर्ग गज है रेट:
चंडीगढ़ में पिछले साल जुलाई तक रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी का कलेक्टर रेट 54912 रुपये प्रति वर्ग गज था और 50 फीसदी बढ़ोतरी होने के बाद नया रेट 82368 रुपये प्रति वर्ग गज हो गया था। नया रेट हाउसिंग बोर्ड के इंडीपेंडेंट मकानों के लिए भी था।
इस कारण नहीं हुई बढ़ोतरी
प्रशासन के अधिकारियों का मानना है कि कलेक्टर रेट में इस साल बढ़ोतरी का कोई उद्देश्य नहीं है। कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी न करने का एक कारण एक साल में शहर में प्रापर्टी के बाजार पर छाई मंदी भी है। पिछले एक साल में शहर में प्रापर्टी की बिक्री बहुत ज्यादा नहीं हो सकी।
कोट
इस साल कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी नहीं होगी। पिछले सालों में कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी हुई है।
- मोहम्मद शाईन, चंडीगढ़ के उपायुक्त और संपदा अधिकारी
एक साल तक यही रहेगा रेट
- हाउसिंग बोर्ड फ्लैट - 30888 रुपये
- निगम के अधीन आने वाले गांवों में रिहायशी प्रॉपर्टी - 10296 रुपये
- चंडीगढ़ प्रशासन के अधीन आने वाले गांव - 6864 रुपये
- सेक्टर-17, 19, 34, 22 और 35 में बूथ - 463320 रुपये
- सेक्टर-17 में एससीओ - 720720 रुपये
- सेक्टर-34, 22 और मध्यमार्ग पर एससीओ - 514800 रुपये
- इंडस्ट्रियल एरिया फेज-एक और दो - 82368 रुपये
(सभी रेट प्रति वर्ग गज)
- ग्रामीण क्षेत्र में कृषि योग्य प्रापर्टी - 1 करोड़ 15 लाख 50 हजार रुपये प्रति एकड़