सड़क की हालत ठीक नहीं हैं। गलियां भी खराब है। प्रशासन व निगम के अधिकारी हमारी बातों को सुने। नगर निगम में जाने के समय कहा गया था कि गांव का सर्वांगीण विकास होगा लेकिन हुआ कुछ भी नहीं। निगम के अधिकारी इस बात को समझें। गांव के लोगों को रोजगार में भी प्राथमिकता दें। - गुरदीप सिंह, पूर्व सरपंच, रायपुर कलां।
गांवों की समस्याओं को जल्द हल करे निगम
गांवों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर नगर निगम ठीक करे। कई गांवों की सड़कें खराब हैं। इसे प्राथमिकता के आधार पर निगम को ठीक करना चाहिए। गांव के लोगों पर कर न लगाया जाए। पानी की दरों को भी कम किया जाना चाहिए। निगम के अधिकारी गांव का दौरा कर जायजा लेते रहें तो विकास में तेजी आएगी। - हुकम चंद, पूर्व सरपंच, खुड्डा अलीशेर।
गांवों की फिरनी में मलबा भरकर चला रहे काम
गांवों की फिरनी की सड़क टूटी हुई हैं। यह सभी गांव का हाल है। नगर निगम में शामिल करने के बाद प्रशासन और नगर निगम ने गांवों की ओर ध्यान देना छोड़ दिया। गांव की फिरनी में मलबा डालकर काम चलाया जा रहा है। बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। निगम में शामिल होने के बाद गांव की हालत और खराब हो गई है। - जीत सिंह, पूर्व डायरेक्टर मार्केट कमेटी, निवासी गांव बहलाना।
जब गांव में पंचायत थी, तब गांव के लोग खुशहाल थे। जब से नगर निगम में शामिल हुआ, तब से स्थिति और खराब हो गई है। सड़कें खराब तो है ही, कई गलियों में लाइट जलती भी नहीं हैं। सीवर और स्टार्म वाटर की लाइन खराब रहती हैं। हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। बारिश होने के बाद सड़क पर निकलना मुश्किल हो जाता है। - डॉ. रंजीत सिंह धीमान, रायपुरखुर्द।
गांवों के बिना शहर का विकास संभव नहीं
गांवों में बड़ी संख्या में लोग रहते हैं। दूसरे राज्यों से आए मजदूरों की बड़ी संख्या है। इसलिए नगर निगम और प्रशासन को चाहिए कि गांव की बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दे। गांव से भी काफी पैसा सरकार को जाता है। इसलिए हमें भी सुविधाएं मिलनी ही चाहिए। गांव के लोगों को सुविधाओं से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। - धर्मेंद्र सिंह, पूर्व सदस्य जिला परिषद और निवासी गांव दड़वा।