यूक्रेन में जारी जंग के दौरान तबाही का एक मंजर।
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24 फरवरी को जब रूस और यूक्रेन के बीच जंग शुरू हुआ तो प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया और जालंधर के जो बच्चे यूक्रेन में फंसे हैं, उनकी जानकारी मांगी। उद्देश्य था कि इस जानकारी को केंद्र सरकार से साझा कर सभी बच्चों को वहां से सुरक्षित निकाला जाए। इसी दौरान यूक्रेन ने वीजा की अनिवार्यता को समाप्त करने की घोषणा भी कर दी। इसके बाद हेल्पलाइन में यूक्रेन से जुड़े सवाल पूछे जाने लगे।
कंट्रोल रूम में दोपहर दो बजे की शिफ्ट में आने वाले विशाल शर्मा ने बताया कि जब से यूक्रेन संकट उत्पन्न हुआ है, वहां पढ़ने गए छात्रों के परिजनों ने जिला प्रशासन के हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क कर बच्चों को निकालने की बात कही। 12 दिनों में अब तक कुल 56 लोगों ने संपर्क किया था लेकिन कुछ लोग यूक्रेन जाने की प्रक्रिया के बारे में पूछ रहे हैं।
ज्यादातर विद्यार्थी पूछ रहे हैं कि यूक्रेन कैसे जाएं, क्या कोई फ्लाइट जा रही है क्योंकि वहां अभी वीजा की जरूरत नहीं है। हम यूक्रेन पहुंचकर किसी भी यूरोपीय देशों में निकल जाएंगे। जब उन्होंने बच्चों को यूक्रेन संकट से भली-भांति परिचित कराया, तब भी उनके सवालों में बदलाव नहीं आया। ये बताता है कि पंजाब के युवाओं में बाहर जाने की कितनी होड़ है और उन्हें किसी भी संकट की कोई परवाह नहीं है। एक अन्य अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त में बताया कि कंट्रोल रूम में फोन करने वाले बच्चे पैसे भी ऑफर कर रहे थे और यूक्रेन कैसे पहुंचा जाए इसकी जानकारी हर हाल में जानना चाहते थे।
अब जब सभी बच्चे लगभग देश लौट चुके हैं तो जाने वालों का सिलसिला तेज हो गया है, विद्यार्थी किसी भी कीमत पर यूक्रेन जाना चाहते हैं। जब जिला प्रशासन के अधिकारियों को इस बात का पता चला तो उन्होंने कंट्रोल रूम में बैठने वाले कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि यूक्रेन जाने को लेकर कोई फोन आता है तो उसकी जानकारी नोट करें। प्रशासन उन बच्चों के घर जाकर अभिभावकों को यूक्रेन के हालात के बारे में बताएगा, जिससे विद्यार्थी को समझाया जा सके।