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ग्राउंड रिपोर्टः पहले आतंकवाद और अब जहरीली शराब, एक गांव जहां हमेशा रहता मौत का साया

Fri, 07 Aug 2020 11:01 AM IST
खुशबू गोयल अमित मरवाहा, तरनतारन
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सांकेतिक तस्वीर
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पंजाब के विधानसभा क्षेत्र खडूर साहिब का गांव पंडोरी गोला पर हमेशा से मौत का काला साया मंडराता रहा है। आतंकवाद के दौर में इस गांव के करीब 24 लोग मौत के घाट उतारे गए थे। आतंकवाद खत्म हुआ तो जमीनी विवाद में एक-एक करके नौ लोगों की जान गई। फिर नशे का शिकार होकर गांव में छह वर्ष के दौरान करीब 12 लोगों की जान गई।
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इनमें से दो युवक ऐसे थे, जिन्होंने नशे की पूर्ति लिए पैसे न मिलने कारण मौत को गले लगा लिया। अब इस गांव में जहरीले जाम के कारण 11 लोगों की जान चली गई। एक तरफ पुलिस द्वारा जहरीली शराब तैयार करने वाले आरोपियों के घरों में छापामारी की जा रही है। दूसरी तरफ जहरीले जाम की भेंट चढ़े लोगों के परिवारों पर आर्थिक संकट आन पड़ा है।

जहरीले जाम की भेंट चढ़े 45 वर्षीय रेशम सिंह के भाई निर्मलजीत सिंह ने बताया कि मजदूरी करने वाला उनका परिवार बुरी तरह से टूट गया है। रेशम सिंह की दो लड़कियों की अभी शादी होनी है। घर की आर्थिक हालात इतने खराब हैं कि गांव के लोग परिवार के लोगों के भोजन का प्रबंध कर रहे हैं।
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अब भी चल रहा है ग्लासी का सिलसिला
ग्रामीण सतनाम सिंह रंधावा, गुरिदर सिंह, जागीर सिंह, बलविंदर सिंह, दीवान सिंह, फौजा सिंह, गुरमुख सिंह, बलवीर सिंह, हीरा सिंह ने आरोप लगाया कि गांव में बहुत सारे परिवार सत्तारूढ़ पार्टी का आशीर्वाद लेकर अवैध शराब का कारोबार करते हैं।

पंजाब में जब आतंकवाद था तो उसी समय यहां पर अवैध शराब का कारोबार होता था। दूर-दूर के गांवों से लोग पंडोरी गोला में शाम को शराब पीने के लिए आते थे। जहरीले जाम के कारण बड़े स्तर पर इस गांव के लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद अवैध शराब का कारोबार जारी है।
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कैसे होगी अंतिम रस्में पूरी

50 वर्षीय प्रगट सिंह तीन बच्चों का पिता था। मजदूरी करके घर का चूल्हा जलाने के साथ वह रोज रूड़ीमार्का शराब भी पीता था। प्रगट सिंह की मां सुखविंदर कौर व लड़के कंवलजीत सिंह ने बताया कि गांव के लोगों ने पैसे इकट्ठे करके उसे अंतिम संस्कार की रस्में पूरी की। अब आत्मिक शांति लिए घर में श्री अखंड पाठ साहिब करवाने के लिए पैसे नहीं है।

28 वर्षीय युवक संदीप सिंह की पत्नी कई साल पहले अपने मासूम बच्चे को छोड़कर मायके चली गई थी। संदीप मजदूरी करके अपने बच्चे का पेट पालता था। उसने गांव से ही 20 रुपये में गिलासी के रूप में अपनी मौत खुद खरीद ली। संदीप के भाई अमरीक सिंह व निशान सिंह ने बताया कि भोग के लिए पैसे जुटाना मुश्किल हो गया है। ऊपर से आठ हजार रुपये बिजली का बिल आ गया है।

ससुर और पति का सहारा छूटा
मजदूरी करने वाले सुच्चा सिंह व उसके लड़के धीरा सिंह की एक दिन के अंतर में जहरीली शराब पीने से मौत हो गई। धीरा सिंह की पत्नी संतोष कुमारी ने बताया कि उसके 17 और 15 साल के लवप्रीत और अर्शदीप अभी तक कोई काम नहीं करते। आर्थिक हालत के कारण दोनों बच्चों की पढ़ाई छूट गई है। ऊपर से सुहाग भी नहीं रहा।
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