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Punjab Election 2022: सर्वे में जनता ने नए चेहरों को नकारा, तब जाके सियासी दलों ने चुनावी मैदान में पुरानों को उतारा

Tue, 25 Jan 2022 12:57 AM IST
ajay kumar अभिषेक वाजपेयी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पंजाब में इस बार सभी दलों ने पुराने चेहरों पर अधिक भरोसा जताया है। इसकी वजह चुनावी सर्वे भी हैं। दरअसल, सर्वे में लोगों ने नए चेहरों को नापसंद कर दिया। मजबूरी में सभी दलों को पुराने चेहरों पर ही सियासी दांव खेलना पड़ा। 
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भाजपा। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अगले महीने होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए राज्य की जनता ने नए चेहरों को नकार दिया है। इसका खुलासा सियासी दलों द्वारा प्रत्याशियों की घोषणा से पहले कराए गए सर्वे में हुआ है। अधिकांश राजनीतिक दलों के सर्वे में नए राजनीतिक चेहरों को पंजाब के लोगों ने पसंद नहीं किया। इसके बाद मजबूरी में राजनीतिक दलों को फिर से पुराने चेहरों पर विश्वास जताना पड़ा। अभी तक पुराने चेहरों पर विश्वास करने में कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल अन्य राजनीतिक दलों से आगे चले रहे हैं।

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विधानसभा चुनाव से पहले यह कयास लगाए जा रहे थे कि इस बार की 16वीं विधानसभा में नए चेहरे दिखाई देंगे। राजनीतिक दल भी पांच साल से सियासत में सक्रिय नए सियासी चेहरों पर नजर रखे हुए थे। चुनाव की घोषणा से पहले सभी राजनीतिक दलों द्वारा नए चेहरों को लेकर पार्टी स्तर पर और निजी कंपनियों के जरिये सर्वे कराया गया। 

सर्वे का परिणाम सियासी दलों के लिए चौंकाने वाले रहे हैं। अधिकांश दलों के सर्वे में लोगों द्वारा नए चेहरों को अच्छा रिस्पांस नहीं दिया गया। इसके बाद आनन-फानन राजनीतिक दलों ने फिर पुराने चेहरों के पास चक्कर काटने शुरू कर दिए। आयोग द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद जारी की गई प्रत्याशियों की सूची में फिर वही चेहरे दिखाई दिए जिनको पंजाब के लोग हमेशा से ही देखते आ रहे हैं। इस बार यह कयास लगाए जा रहे थे कि किसानों के विरोध के कारण भाजपा नए चेहरों पर दांव खेलेगी लेकिन यहां भी पुराने चेहरे ही ताल ठोकते दिखाई दे रहे हैं। 
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अभी तक सबसे ज्यादा पुराने चेहरे कांग्रेस और शिअद में दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस ने अभी तक 86 प्रत्याशियों की सूची में 58 मौजूदा विधायकों को टिकट दिया है। यही हाल शिअद का है। शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल ने भी अधिकांश पुराने चेहरों पर ही दांव खेला है। 

नाराज नए चेहरे घर बैठे
टिकट नहीं मिलने से नए सियासतदानों को काफी निराशा हाथ लगी है। इस कारण से पांच साल तक टिकट की आस में राजनीति में सक्रिय कार्यकर्ता फिलहाल घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। यही कारण है कि राजनीतिक दलों का चुनावी माहौल भी गरम नहीं हो पा रहा है। आम कार्यकर्ताओं की चुनाव से यह दूरी राजनीतिक दलों को भी परेशान कर रही है। 

प्रचार पर रोक ने भी बढ़ाया इंतजार
सर्वे के साथ ही कोरोना संक्रमण के कारण चुनाव प्रचार पर लगी रोक भी नए चेहरों को पीछे रखने में बड़ी वजह बनी। राजनीतिक दल यह जानते थे कि चुनाव में नए चेहरों के लिए प्रचार की आवश्यकता ज्यादा होगी, जिसमें समय अधिक लगेगा। संक्रमण के बढ़ते दायरे को देखते हुए नेताओं को उम्मीद है कि आयोग प्रचार की रोक को अभी और बढ़ा सकता है। ऐसे में फिर रणनीति में बदलाव कर पुराने चेहरों को ही आगे करना दलों ने उचित समझा।

क्या रहा सर्वे का प्रतिशत
प्रत्याशियों की खोज में कराए गए सर्वे में पुराने चेहरों का प्रतिशत नए सियासी चेहरों पर हावी रहा। अधिकांश दलों के सर्वे में नए चेहरों को 25-30 प्रतिशत ही पंजाब के लोगों ने पसंद किया। सर्वे में दलों ने सभी आयु वर्ग के लोगों को शामिल किया था। बदलाव के कारण युवाओं की संख्या सर्वे में अधिक रखी गई, इसके बाद भी सर्वे के परिणाम युवाओं के लिए ही अच्छे नहीं रहे।

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