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स्टडी में बड़ा खुलासा, नोटबंदी से लोग हो रहे डिप्रेशन का शिकार

Sun, 20 Nov 2016 12:46 AM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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- फोटो : File Photo
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नोटबंदी का असर लोगों के जीवन और कारोबार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों को मानसिक बीमार भी कर रहा है। जो लोग पहले से ही तनाव के शिकार थे, उनमें तनाव और बढ़ गया है। डिप्रेशन के नए मरीज भी आ रहे हैं। ओपीडी भी बढ़ गई है। ऐसे में जिन लोगों में घबराहट और धड़कने तेज हुई, वह जरूर मनोचिकित्सक को दिखाएं। उनमें दिक्कतें और भी बढ़ सकती हैं।
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   चंडीगढ़ के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि इस बड़े फैसले से वही परेशान हैं, जिनके पास कमाई का पैसा है। वह बहुत ही आसानी से अपने रुपयों का इस्तेमाल कर रहे थे, लेकिन एक फैसले के बाद से उनमें चिंता बढ़ गई है। असुरक्षा की भावना आ गई है। उन्होंने कभी भी इतने बड़े फैसले की उम्मीद नहीं की थी। नोटबंदी के बाद से जिस तरह से अफवाहें फैलीं हैं, उससे भी उनमें घबराहट बढ़ी है। अब लोगों को लग रहा है कि जिस तरह से नोटबंदी को लेकर फैसला लिया गया है, उसके बाद जल्द ही कोई दूसरा बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

  उन्होंने बताया कि यह डिप्रेशन आसानी से नहीं जाता है। इसको दूर होने में कई दिन लग सकते हैं। कई महीने तक इसका असर रहता है। इस फैसले से पूरा देश हिल गया है। उन लोगों में डिप्रेशन तो बढ़ना ही था, जो पहले से मानसिक बीमार थे। उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी बात यह है कि लोग डिप्रेशन में आ जाते हैं, लेकिन वह इस बात को स्वीकार नहीं करते। इससे उनमें धीरे-धीरे दूसरी बीमारियां बढ़ती है।
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पाई-पाई को तरसे लोग - फोटो : File Photo
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डॉक्टरों के मुताबिक, यदि नोटबंदी के फैसले के बाद से लोगों में घबराहट का बढ़ना, धड़कन बढ़ना, हाथ-पैर कांपना, जल्द गुस्सा होना और चिड़चिड़ापन जैसे दिखें तो उन्हें काउंसिलिंग और दवा की जरूरत है। यदि वह पहले से ही बीमार हैं तो उनमें पैनिक अटैक भी पड़ सकता है।

जब से नोटबंदी का फैसला आया है, तब से 8 से दस नए मरीज आ चुके हैं। सरकार का यह फैसला किसी भूकंप के झटके से कम नहीं है। लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। उन्हें लग रहा है कि आगे भी कोई बड़ा फैसला आ सकता है। इससे लोगों में डिप्रेशन बढ़ा है। - डॉ. प्रमोद कुमार, डा. प्रमोद क्लीनिक चंडीगढ़
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