सेक्टर-15 निवासी धर्मेंद्र (60) पांच दिन पहले कोरोना संक्रमित पाए गए। डॉक्टरों ने अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी तो उन्होंने साफ मना कर दिया। महज 3 दिन बाद ऑक्सीजन का स्तर तेजी से नीचे गिरने लगा। रैपिड रिस्पांस टीम पहुंची तो पता चला कि धर्मेंद्र को शुगर भी है। इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को नहीं दी गई थी। आनन-फानन में जीएमएसएच-16 के कोविड वार्ड में भर्ती कर स्थिति पर नियंत्रण किया गया।
केस -2
ठीक ऐसी ही स्थिति का सामना मनीमाजरा निवासी 72 वर्षीय मनदीप सिंह को करना पड़ा। उन्होंने भी डॉक्टरों के बार-बार कहने के बावजूद अस्पताल जाना ठीक नहीं समझा। संक्रमित होने के 48 घंटे बाद स्थिति गंभीर हो गई। आनन-फानन में उन्हें पीजीआई में भर्ती करना पड़ा। इससे उनके साथ परिजनों को भी परेशानी का सामना पड़ा।
हेल्प डेस्क को दी जा रही गलत सूचना
अस्पताल आने के डर से बचने के लिए संक्रमित हेल्प डेस्क को गलत सूचनाएं दे रहे हैं। यही वजह है कि स्थिति अचानक गंभीर हो जा रही है। स्वास्थ्य निदेशक डॉ. अमनदीप कंग ने कहा कि जिन मरीजों को पहले से गंभीर बीमारी है, वह छिपाएं नहीं। गलत सूचना देना उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
जिन संक्रमित मरीजों को पहले से कोई गंभीर बीमारी है, वह घर पर रहने की गलती न करें। क्योंकि उनकी स्थिति अचानक गंभीर हो सकती है। खास तौर पर 60 साल से ज्यादा उम्र के मरीजों को घर की बजाय अस्पताल में एकांतवास में रखने का प्रयास किया जा रहा है। -डॉ. अमनदीप कंग, स्वास्थ्य निदेशक