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अमर उजाला पड़ताल: मरीज बढ़ने से ध्वस्त हुई व्यवस्था, पीजीआई में एमआरआई के लिए मिल रही एक साल बाद की तारीख

Thu, 14 Jul 2022 03:21 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

जीएमएसएच-16 में एमआरआई पिछले चार महीने से बंद है। टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद वहां यूनिट के रिनोवेशन में अभी दो से तीन महीने का समय लगेगा।
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विस्तार
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चंडीगढ़ के अस्पतालों में मरीजों की तेजी से बढ़ती संख्या से व्यवस्था ध्वस्त होने लगी है। मरीजों से सबसे ज्यादा पीजीआई की जांच व्यवस्था प्रभावित हो रही है। आलम यह है कि पीजीआई की ओपीडी में आने वाले मरीजों को एमआरआई के लिए 11 से 12 महीने बाद की डेट दी जा रही है इससे मरीज काफी परेशान हैं। इसका कारण यह है कि सरकारी इलाज की उम्मीद में आए मरीजों को अपनी जान बचाने के लिए निजी लैब में तीन से चार गुना ज्यादा शुल्क अदा कर जांच करानी पड़ रही है।

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स्थिति यह है कि इसमें राहत देने के लिए पीजीआई प्रशासन चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहा है क्योंकि जांच मशीनों की संख्या बढ़ाने के बावजूद मरीजों की संख्या के आगे सुविधा न के बराबर साबित हो रही है। उधर, जीएमसीएच-32 में एमआरआई के लिए ढाई से तीन महीने की डेट दी जा रही है। वहीं, जीएमएसएच-16 में करीब चार महीने से एमआरआई बंद है।

गौरतलब है कि कोविड के दौरान गैर कोविड मरीजों की संख्या कम होने से इस तरह की परेशानी कम हो गई थी लेकिन अब ओपीडी पूरी तरह से संचालित होने के कारण प्रतिदिन 9 हजार से 10 हजार मरीजों का इलाज किया जा रहा है। परेशानी इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि जीएमएसएच-16 में एमआरआई पिछले चार महीने से बंद है। टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद वहां यूनिट के रिनोवेशन में अभी दो से तीन महीने का समय लगेगा।

जनता के हित में हो काम

सरकारी तंत्र में अब ज्यादातर कार्य अपने फायदे को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। इस कारण से जनता को लाभ नहीं मिल पा रहा। अस्पतालों में भी इसी ढर्रे पर काम करने का ऐसा परिणाम सामने आ रहा है।  -गौरव, इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2

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गंभीर मरीजों की जान से खिलवाड़ न हो

यह बात सोचने वाली है कि एक गंभीर मरीज किसी जांच के लिए कितने दिन तक इंतजार कर सकता है। एमआरआई सर्दी-जुकाम होने पर तो कराई नहीं जाती। कम से कम उन गंभीर मरीजों की जान से खिलवाड़ तो बंद होना ही चाहिए।  -दालचंद, रामदरबार

सरकारी अस्पतालों में एमआरआई की यह है स्थिति

- जीएमएसएच-16 में पिछले चार महीने से बंद है एमआरआई
- पीजीआई में मौजूदा समय में पांच एमआरआई मशीनों का हो रहा संचालन
- पीजीआई में एमआरआई के लिए 2500 रुपये शुल्क है तय
-यहां एक ओपीडी, एक कार्डियक सेंटर, एक ट्रॉमा सेंटर और दो रेडियोडायग्नोसिस विभाग में हैं इंस्टॉल
- प्रतिदिन 80 से 90 मरीजों की की जा रही है एमआरआई
- जीएमसीएच-32 में एमआरआई की एक मशीन है और यहां जांच के लिए तय है 1800 रुपये शुल्क
- यहां मरीजों को ढाई से तीन महीने बाद की दी जा रही है डेट

पीजीआई में यहां के इतनों मरीजों का दबाव

राज्य               मरीजों का प्रतिशत
पंजाब               36.6 प्रतिशत
चंडीगढ़            20.3 प्रतिशत
हरियाणा          18.3 प्रतिशत
हिमाचल प्रदेश   12.2 प्रतिशत
उत्तर प्रदेश      4.1 प्रतिशत
जम्मू-कश्मीर      3.7 प्रतिशत
उत्तराखंड          1 प्रतिशत
अन्य                 3.8 प्रतिशत

विभाग लगातार प्रयास कर रहा है कि मरीजों को बेहतर सुविधा मुहैया कराई जाए लेकिन पीजीआई में रेफर मरीजों का दबाव तेजी से बढ़ रहा है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एक नई एमआआई मशीन लगाई जा रही है।  - प्रो. एमएस संधु, प्रमुख पीजीआई रेडियोडाइग्नोसिस विभाग

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