पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने गुरुवार को पूर्व मंत्री संगत सिंह गिलजियां के भतीजे दलजीत सिंह गिलजियां के चंडीगढ़ सेक्टर-37 स्थित आवास पर छापा मारा। इस दौरान ब्यूरो के अधिकारियों ने दिलजीत का लैपटॉप, कई पैन ड्राइव और हार्ड डिस्क कब्जे में ले ली है। उधर, मोहाली कोर्ट ने दलजीत को तीन दिन के रिमांड पर भेज दिया।
सूत्रों के अनुसार, विजिलेंस ब्यूरो के अधिकारियों ने दलजीत के आवास से मिली वस्तुएं जांच के लिए अपने आईटी सेल को सौंप दी हैं। इसके अलावा उनकी निजी मर्सडीज कार पर भी ब्यूरो ने संज्ञान लिया है, क्योंकि उस पर एमएलए का स्टीकर लगा था, जो केवल पूर्व विधायक या मौजूदा विधायक द्वारा ही अपने किसी एक वाहन पर लगाया जा सकता है।
ब्यूरो ने इस मामले में दलजीत के खिलाफ अलग से केस दर्ज करने का फैसला किया है। उधर, विजिलेंस ब्यूरो ने दलजीत को गुरुवार को मोहाली की विशेष अदालत में पेश किया। विजिलेंस ने अदालत से 10 दिन का रिमांड मांगा लेकिन बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद तीन दिन का रिमांड मंजूर किया। सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम खचाखच भरा हुआ था।
दलजीत सिंह की गिरफ्तारी को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। स्थिति ऐसी हो गई कि न्यायाधीश को हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को शांत करवाना पड़ा। विजिलेंस ने अदालत को बताया कि दलजीत सिंह एडवोकेट होने के साथ-साथ पूर्व वन मंत्री संगत सिंह गिलजियां का भतीजे है। उसके पास पूर्व मंत्री द्वारा ट्री-गार्ड की खरीद की एवज में ली गई रिश्वत से संबंधित कई अहम जानकारी है।
अदालत को विजिलेंस ने बताया कि पूर्व मंत्री गिलजियां और एडवोकेट दलजीत सिंह के बीच आपस में व्हाट्सएप कॉल या मैसेज के जरिए बातचीत होती थी, जिसे खंगालना जरूरी है। इसके अलावा एडवोकेट दलजीत सिंह ने अपनी कार के ऊपर पंजाब सरकार का स्टिकर तक लगा रखा था। वह पूर्व मंत्री के बैंकों के लेनदेन हिसाब भी रखता था। इतना ही नहीं पूर्व मंत्री संगत सिंह गिलजियां का ट्विटर अकाउंट को भी हैंडल करता था। विजिलेंस ने दलील रखी कि एडवोकेट दलजीत सिंह को पूर्व में दर्ज एफआईआर को आधार बनाकर गिरफ्तार किया गया है।
बचाव पक्ष की दलील
बचाव पक्ष ने कहा कि एडवोकेट दलजीत ने केस से संबंधित दस्तावेजों के लिए हमेशा विजिलेंस से संपर्क किया। विजिलेंस की टीम जिस वायस कालिंग व चैट को आधार बनाकर नाम जोड़ रही है तो एक वकील होने के नाते केस के लिए दस्तावेजों की जरूरत को लेकर बातचीत नार्मल वायस कालिंग व व्हाट्सएप चैट से होती थी। इसके अलावा गिलजियां की चेकबुक से पैसों के आदान-प्रदान के जिस ब्योरे को विजिलेंस आधार बना रही है वो विधानसभा चुनाव से संबंधित है, क्योंकि एडवोकेट दलजीत सिंह ही पूर्व मंत्री गिलजियां के चुनाव में होने वाले खर्च का हिसाब रखता था।