दोषी सुनील कालड़ा को हिरासत से भागे अपराधियों को आश्रम देने के दोष में तीन साल की कैद व एक हजार जुर्माना, जबकि गुरप्रीत सिंह को आर्म्स एक्ट में पांच साल की कैद व 5000 रुपये जुर्माने की सजा हुई है। वरिष्ठ वकील सुमेश जैन ने बताया कि दोषी बिकर सिंह व सुखचैन सिंह उर्फ सुक्खी को अदालत ने नशा तस्करी का भी दोषी पाया था। इनके पास से भारी मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद किए थे। इसलिए इनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत भी कार्रवाई हुई थी। अदालत ने दोनों को 10-10 साल की कैद और एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना न देने की सूरत में इन्हें चार-चार साल की अतिरिक्त कैद भुगतनी पड़ेगी।
कैसे हुआ था जेल ब्रेक
27 नवंबर, 2016 को हुआ यह जेल ब्रेक पूरे देश में चर्चा में रहा था। पुलिस की वर्दी में तीन गाड़ियों में हथियारों से लैस होकर आए करीब 15 अपराधियों ने जेल पर हमला कर दो आतंकियों व चार गैंगस्टरों को छुड़ा लिया था। इन्होंने जेल में एक कैदी को लाने का दिखावा किया, जिस पर मेन गेट पर तैनात गार्ड ने इन्हें अंदर जाने दिया। अंदर घुसते ही अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद वह बैरकों में घुस गए जहां खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) के आतंकी हरमिंदर सिंह मिंटू, आतंकी कश्मीर सिंह और चार अन्य गैंगस्टर हरजिंदर सिंह भुल्लर उर्फ विक्की गौंडर, गुरप्रीत सिंह सेखों, कुलप्रीत सिंह उर्फ नीटा दियोल और अमनदीप सिंह उर्फ धोतियां इनका इंतजार कर रहे थे।
आरोपियों ने एक जेल गार्ड से उसकी एसएलआर गन भी छीन ली और छह कैदियों को लेकर फरार हो गए थे। आतंकी मिंटू की अप्रैल 2018 में जेल में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी। आतंकी कश्मीर सिंह अभी तक फरार है। विक्की गौंडर जनवरी 2018 में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। बाकी गुरप्रीत सिंह सेखों, कुलप्रीत सिंह उर्फ नीटा दियोल और अमनदीप सिंह उर्फ धोतियां को फिर से पकड़ लिया गया था।
इनको किया बरी
मोहम्मद असीम, नरेश नारंग, तेजिंदर शर्मा, जतिंदर सिंह उर्फ टोनी, वरिंदर सिंह उर्फ रिकी सहोता व रणजीत सिंह शामिल हैं। इन सभी पर जेल ब्रेक कांड की साजिश रचने, जेल तोड़ने वाले अपराधियों को हथियार मुहैया कराने, इनकी पैसों से मदद करने व बाद में इन्हें पनाह देने के आरोप लगे थे, लेकिन साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट ने इन्हें बरी कर दिया था।