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Nabha Jail Break: नाभा जेल ब्रेक मामले में आया फैसला, नौ गैंगस्टरों समेत 22 दोषियों को दस-दस साल की कैद

Thu, 23 Mar 2023 03:24 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)

सार

27 नवंबर 2016 को नाभा की मैक्सिमम सिक्योरिटी जेल पर पुलिस की वर्दियों में आए अपराधियों ने फायरिंग करते हुए हमला बोला और जेल से खालिस्तान लिब्रेशन फोर्स के प्रमुख आतंकी हरमिंदर सिंह मिंटू व आतंकी कश्मीर सिंह समेत गैंगस्टरों विक्की गौंडर, गुरप्रीत सिंह सेखों, कुलप्रीत सिंह नीटा दियोल और अमनदीप सिंह को भगा कर ले गए थे। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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बहुचर्चित नाभा जेल ब्रेक मामले में पटियाला के एडिशनल सेशन जज एचएस ग्रेवाल की अदालत ने गुरुवार को दो जेलकर्मियों और नौ गैंगस्टरों समेत 20 को 10-10 साल कैद की सजा सुनाई। अन्य दो दोषियों में से एक को पांच व दूसरे को तीन साल की सजा सुनाई गई। अदालत ने इस मामले में मंगलवार को 22 आरोपियों को दोषी करार दिया था, जबकि छह को बरी कर दिया था। 

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अदालत ने जेल ब्रेक की साजिश रचने व ड्यूटी में लापरवाही बरतने के दोष में जेल के सहायक सुपरिंटेंडेंट सिक्योरिटी रहे भीम सिंह व हेड वार्डर जगमीत सिंह को 10 साल की कैद के अलावा 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा भी सुनाई है। जुर्माना न भरने पर इन्हें दो साल की अतिरिक्त कैद भुगतनी पड़ेगी।

अन्य दोषियों में गैंगस्टर गुरप्रीत सिंह सेखों, अमनदीप सिंह उर्फ धोतियां, सुलखन सिंह उर्फ बब्बर, मनवीर सिंह उर्फ मनी सेखों, कुलप्रीत सिंह उर्फ नीटा दियोल, गुरप्रीत सिंह खौरा, बिकर सिंह, पलविंदर सिंह उर्फ पिंदा व जगतवीर सिंह उर्फ जगता, गुरजीत सिंह, हरजोत सिंह उर्फ जोत, कुलविंदर सिंह उर्फ ढिंबरी, राजविंदर सिंह उर्फ राजू सुल्तान, रविंदर सिंह उर्फ ग्याना, सुखचैन सिंह उर्फ सुक्खी, मनजिंदर सिंह, अमन कुमार व किरण पाल सिंह उर्फ किरणा को साजिश रचने डकैती, हत्या की कोशिश, सरकारी ड्यूटी में बाधा डालने समेत अन्य धाराओं में 10-10 साल कैद की सजा व 10 हजार जुर्माने की सजा सुनाई गई। इन्हें भी जुर्माना अदा न करने पर दो साल की अतिरिक्त कैद भुगतती होगी। 
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दोषी सुनील कालड़ा को हिरासत से भागे अपराधियों को आश्रम देने के दोष में तीन साल की कैद व एक हजार जुर्माना, जबकि गुरप्रीत सिंह को आर्म्स एक्ट में पांच साल की कैद व 5000 रुपये जुर्माने की सजा हुई है। वरिष्ठ वकील सुमेश जैन ने बताया कि दोषी बिकर सिंह व सुखचैन सिंह उर्फ सुक्खी को अदालत ने नशा तस्करी का भी दोषी पाया था। इनके पास से भारी मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद किए थे। इसलिए इनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत भी कार्रवाई हुई थी। अदालत ने दोनों को 10-10 साल की कैद और एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना न देने की सूरत में इन्हें चार-चार साल की अतिरिक्त कैद भुगतनी पड़ेगी।

कैसे हुआ था जेल ब्रेक
27 नवंबर, 2016 को हुआ यह जेल ब्रेक पूरे देश में चर्चा में रहा था। पुलिस की वर्दी में तीन गाड़ियों में हथियारों से लैस होकर आए करीब 15 अपराधियों ने जेल पर हमला कर दो आतंकियों व चार गैंगस्टरों को छुड़ा लिया था। इन्होंने जेल में एक कैदी को लाने का दिखावा किया, जिस पर मेन गेट पर तैनात गार्ड ने इन्हें अंदर जाने दिया। अंदर घुसते ही अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद वह बैरकों में घुस गए जहां खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) के आतंकी हरमिंदर सिंह मिंटू, आतंकी कश्मीर सिंह और चार अन्य गैंगस्टर हरजिंदर सिंह भुल्लर उर्फ विक्की गौंडर, गुरप्रीत सिंह सेखों, कुलप्रीत सिंह उर्फ नीटा दियोल और अमनदीप सिंह उर्फ धोतियां इनका इंतजार कर रहे थे। 

आरोपियों ने एक जेल गार्ड से उसकी एसएलआर गन भी छीन ली और छह कैदियों को लेकर फरार हो गए थे। आतंकी मिंटू की अप्रैल 2018 में जेल में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी। आतंकी कश्मीर सिंह अभी तक फरार है। विक्की गौंडर जनवरी 2018 में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। बाकी गुरप्रीत सिंह सेखों, कुलप्रीत सिंह उर्फ नीटा दियोल और अमनदीप सिंह उर्फ धोतियां को फिर से पकड़ लिया गया था।

इनको किया बरी
मोहम्मद असीम, नरेश नारंग, तेजिंदर शर्मा, जतिंदर सिंह उर्फ टोनी, वरिंदर सिंह उर्फ रिकी सहोता व रणजीत सिंह शामिल हैं। इन सभी पर जेल ब्रेक कांड की साजिश रचने, जेल तोड़ने वाले अपराधियों को हथियार मुहैया कराने, इनकी पैसों से मदद करने व बाद में इन्हें पनाह देने के आरोप लगे थे, लेकिन साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट ने इन्हें बरी कर दिया था।
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