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जानिए, 330 एनआरआई क्यों नहीं लौटे इंडिया?

Sun, 10 Aug 2014 05:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मोगा(पंजाब)
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पंजाब के मोगा में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट जारी करवा कर विदेश गए करीब 58 महिलाओं समेत 330 एनआरआई गिरफ्तारी के डर से वतन नहीं लौट रहे। इन की गिरफ्तारी के लिए एलओसी जारी की हुई है।
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छह साल पहले 13 जुलाई 2008 को हुए पासपोर्ट घोटाले के मामले में विशेष जांच टीम ने अदालत में नाबालिग लड़की समेत छह फर्जी पासपोर्ट धारकों के खिलाफ 15वां आरोप पत्र दायर किया है। चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट पूजा अंदोतरा की अदालत ने केस की अगली सुनवाई के लिए 6 सितंबर तय की है।

ऐसे हुआ था फर्जी पासपोर्ट मामले का खुलासा

विशेष जांच टीम के मुताबिक 2002 से 2008 तक जिले से संबंधित 795 पासपोर्ट फाइलों की जांच के दौरान करीब 395 फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बने पासपोर्ट की पुष्टि हुई थी।

इस घोटाले में गांव जैमलवाला के मृतक के नाम पर बठिंडा में सक्रिय एक गैंगस्टर के अलावा ड्रग माफिया के कई सदस्य पासपोर्ट बनाने में सफल रहे। मामले में 15 महिलाओं समेत 70 फर्जी पासपोर्ट धारक, चंडीगढ़ की 14 ट्रैवल एजेंसियों के संचालक और 6 एजेंटों समेत 97 आरोपी गिरफ्तार किए गए थे।

इस वक्त करीब 91 आरोपी अदालती कार्रवाई का सामना कर रहे हैं जिनमें से 6 भगोड़े करार दिए गए हैं। दिल्ली की एक महिला समेत 5 अन्य आरोपियों के अदालत से गैरहाजिर होने के कारण उनको भगोड़ा करार देने की कार्रवाई चल रही है।
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पुलिसकर्मी ने किया था फ्रॉड का पर्दाफाश

जिला पुलिस प्रमुख दफ्तर की सिक्योरिटी ब्रांच में तैनात रहे और अब बर्खास्त हो चुके हवलदार जसविंदर सिंह, गुरदयाल सिंह और रणजीत सिंह ने ट्रैवल एजेंटों की मिलीभगत से जालंधर, गुरदासपुर, होशियारपुर, मोगा, लुधियाना और फरीदकोट के कई लोगों के फर्जी राशन कार्ड, जन्म सर्टिफिकेट आदि दस्तावेजों के आधार पर मोगा शहर की गांधी रोड, शहर की हद पर पड़ते गांव दुनेके और गांव चड़िक, बाघापुराना के पते पर पासपोर्ट बना दिए थे।

मामले का इसी ब्रांच में तैनात एक पुलिस मुलाजिम सतपाल सिंह ने पर्दाफाश किया था और उसकी शिकायत पर यह एफआईआर दर्ज की गई थी।
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