अलग एसजीपीसी मुद्दे पर हुड्डा सरकार के प्रस्ताव के विरोध में सोमवार को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और शिअद का एक शिष्टमंडल हरियाणा के राज्यपाल जगन्नाथ पहाड़िया से मिला।
ज्ञापन सौंपने पहुंचे शिष्टमंडल ने हुड्डा सरकार के बिल को अवैध और सिख धर्म के मामलों में दखलंदाजी बताया। सभी ने राज्यपाल से विनती की कि वह इसे सहमति न दें। बता दें कि राज्यपाल ने सोमवार को इस बिल को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
एसजीपीसी अध्यक्ष मक्कड़ सहित अकाली नेताओं ने राज्यपाल से कहा कि हरियाणा की विधानसभा में पारित अलग एसजीपीसी बिल को स्वीकृति के लिए राष्ट्रपति के पास भेजने से पहले कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श अवश्य लें। सौंपे गए ज्ञापन में कहा कि राज्य की विधानसभा को ऐसे किसी भी मामले पर कानून बनाने का अधिकार नहीं है, जो कि संसद के बनाए गए कानून के अधीन आता हो।
एसजीपीसी के अधिकार क्षेत्र पर है हमला
देश के विभाजन के बाद भी अविभाजित पंजाब और पेप्सू के घेरे में आने वाले गुरुद्वारों की सेवा संभाल सिख गुरुद्वारा एक्ट-1925 के तहत शिरोमणि गुरुद्वारा प्रंबधक कमेटी के अधिकार क्षेत्र में आती है। शिरोमणि कमेटी के इस अधिकार क्षेत्र को वर्ष 1966 में पंजाब के पुनर्गठन के बाद भी संसद ने कायम रखा और इसे अंतर्राज्यीय कॉरपोरेट संस्था भी घोषित किया।
सिख नेताओं ने कहा कि हरियाणा विधानसभा में पारित बिल अंतरराज्यीय संस्था एसजीपीसी के अधिकार क्षेत्र पर हमला है। इसके साथ ही यह सिख गुरुद्वारा एक्ट-1925 के अधीन अधिसूचित किए गए गुरुद्वारा साहिबान को एसजीपीसी के अधिकार क्षेत्र से बाहर करने वाला कदम है।
साथ ही कहा कि सिख गुरुद्वारा साहिबान की सेवा संभाल के लिए हरियाणा विधानसभा को कानून बनाने की इसलिए भी कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि इसके लिए पहले से ही एक केंद्रीय कानून मौजूद है।
संसद में पारित कानून से टकराता है बिल
हरियाणा विधानसभा में पारित बिल संसद में पारित कानून से सीधा टकराता है। उन्होंने पंजाब री-ऑर्गेनाइजेशन एक्ट-1966 की धारा-72 का हवाला देते हुए कहा कि अंतरराज्यीय संस्था एसजीपीसी के संबंध में कोई कानून बनाना केंद्र सरकार के अधीन आता है।
विधानसभा के पास इस संस्था को विभाजित करने या तोड़ने संबंधी किसी प्रकार का बिल या कानून पास करने का अधिकार नहीं है।
एसजीपीसी अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़, शिअद प्रवक्ता डॉ. दलजीत सिंह चीमा, महासचिव हरचरण सिंह बैंस आदि।