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पार्किंग का संकट: चंडीगढ़ में हर तीन मिनट में सड़क पर उतर रही एक नई गाड़ी, कोई पार्क तो कोई सड़क पर खड़ा कर रहा वाहन

Mon, 06 Jun 2022 11:30 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

जितनी जनसंख्या के लिए चंडीगढ़ बसाया गया था, 2051 तक उसकी चार गुना ज्यादा आबादी हो जाएगी। ट्राइसिटी में 2051 तक आबादी 45 लाख होगी। प्रशासन न तो नई गाड़ियों के सड़क पर उतरने की रफ्तार को कम कर पाया है, न ही जो पूर्व की योजनाएं को लागू कर पाया है।  
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चंडीगढ़ में पार्किंग की समस्या। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जो चंडीगढ़ शहर सिर्फ पांच लाख लोगों के रहने के लिए बसाया गया था, वहां आज हर तीन मिनट में एक नई गाड़ी सड़क पर उतर रही है। इसका असर पार्किंग व्यवस्था पर पड़ा है। लोग कार खरीदते जा रहे हैं लेकिन उनके पास पार्किंग की जगह नहीं है। सड़क, पार्क, ग्रीन बेल्ट, फुटपाथ और खेल के मैदान हर जगह कारें खड़ी दिखाई देती हैं और प्रशासन मूकदर्शक बन इस बिगड़ती स्थिति को देख रहा है।

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चंडीगढ़ में प्रति 1000 लोगों पर 731 गाड़ियां हैं, जो पूरे देश में सबसे ज्यादा है। घनी आबादी वाले इलाकों में पार्किंग की समस्या सबसे ज्यादा है। वहां तेजी से लोग दोपहिया से चारपहिया की तरफ जा रहे हैं। इन इलाकों में पहले ही पार्किंग की जगह नहीं है, ऐसे में लोगों ने कॉलोनियों के छोटे-छोटे पार्कों में गाड़ियां खड़ी कर उसे पार्किंग बना दिया है। आलम यह है कि अब पार्कों में भी जगह नहीं बची है। ऐसे में सड़कों पर गाड़ियां खड़ी होने लगी हैं। स्थिति दिन प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। 

आपात स्थिति में कार निकालना भी मुश्किल

यही हाल सेक्टरों का भी है। रात के समय में सड़क के दोनों ओर कारें खड़ी हो जाती हैं। लोगों का कहना है कि अगर रात में आपात स्थिति में किसी को अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ती है तो कार निकालना मुश्किल होता है। शहर की जनसंख्या भी तेजी से बढ़ रही है। रेल इंडिया तकनीकी और आर्थिक सेवा (राइट्स) के सर्वे के अनुसार चंडीगढ़ की वर्तमान जनसंख्या 12.95 लाख है, जो 2051 में 22.10 लाख होगी।

ये काम कर लेता प्रशासन तो कुछ बदल जाती सूरत

  • सभी सब-सेक्टर में कम्युनिटी पार्किंग की शुरुआत की जानी थी। अगर इसे लागू कर दिया जाता तो पार्किंग की काफी समस्या का समाधान हो जाता।
  • बड़े सरकारी व निजी दफ्तरों में कर्मचारियों के लिए बस सेवा शुरू करने की योजना थी। प्रशासन ने खुद अपने विभागों में भी इसे लागू नहीं किया।
  • सरकारी दफ्तरों व स्कूलों के समय को अलग-अलग करना था ताकि छुट्टी के समय जाम न लगे। इस पर भी काम नहीं हुआ।
  • पंचकूला, मोहाली और जीरकपुर को जोड़ने के लिए चंडीगढ़ से एक बस कॉरिडोर शुरू करना था लेकिन कॉरिडोर तो दूर बस शेल्टर तक नहीं बने।
  • साइकिल को बढ़ावा देना था। सलाहकार धर्मपाल ने एक दिन साइकिल से दफ्तर आने को अनिवार्य करने की बात कही थी। अधिकारियों ने रुचि नहीं दिखाई।

 

अफसरों को पार्किंग की कोई समस्या नहीं है। उनके पास वीआईपी का टैग है और हर जगह अलग से पार्किंग की जगह है। एक बार वीआईपी टैग हटा दिया जाए तो उन्हें पता चलेगा कि लोग किस समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसा हो गया तो कुछ ही दिनों में ये समस्या दूर हो जाएगी।  -पल्लव मुखर्जी, सीनियर आर्किटेक्ट

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