पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में 24 जनवरी को सुनवाई के दौरान यूटी प्रशासन को 30 दिन के अंदर पार्किंग पॉलिसी को तय करना था। 26 दिन बाद सिर्फ यह तय हुआ है कि पार्किंग पॉलिसी को लागू कौन करेगा। बीते करीब एक महीने से प्रशासन का टाउन प्लानिंग और ट्रांसपोर्ट विभाग पार्किंग पॉलिसी को तय करने के लिए एक-दूसरे को प्रस्ताव भेज रहे थे। दोनों विभागों का कहना था कि पार्किंग पॉलिसी को लागू करना उनके दायरे में नहीं आता है। अब प्रशासन ने तय किया है कि टाउन प्लानिंग विभाग ही पॉलिसी को लागू करेगा।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह तय किया था कि 30 दिन के अंदर पॉलिसी को तय किया जाएगा। इसके तुरंत बाद 30 दिन का समय देकर ड्राफ्ट पार्किंग पॉलिसी पर शहरवासियों के सुझाव और आपत्तियां मांगी जाएंगी। इसके बाद पॉलिसी को फाइनल कर शहर में लागू कर दिया जाएगा, इसके लिए 30 दिन का समय दिया गया था। इस पूरी प्रक्रिया के लिए हाईकोर्ट ने 90 दिन का समय तय किया था। अब सिर्फ 64 दिन बाकी रह गए हैं, ऐसे में टाउन प्लानिंग विभाग के लिए पॉलिसी को लागू करना काफी चुनौतीपूर्ण होगा।
टाउन प्लानिंग विभाग प्रशासन में आर्किटेक्ट विभाग का हिस्सा है। बीते कई दिनों से चीफ आर्किटेक्ट कपिल सेतिया की तरफ से कहा जा रहा था कि उन्होंने पार्किंग पॉलिसी को तैयार कर ट्रांसपोर्ट विभाग को भेज दिया है, जबकि ट्रांसपोर्ट विभाग का कहना था कि पार्किंग पॉलिसी से उनका कोई लेना-देना नहीं है। ट्रांसपोर्ट सेक्रेटरी ने यह कहते हुए फाइल लौटा दी कि उनका विभाग केवल वाहनों की संख्या देने तक सीमित है।
ढाई साल पहले भी बना था पार्किंग पॉलिसी का ड्राफ्ट
पार्किंग पॉलिसी बीते ढाई साल से अधर में लटकी है। शहर में बढ़ते ट्रैफिक जाम और पार्किंग की समस्या को देखते हुए यूटी प्रशासन ने पार्किंग पॉलिसी का ड्राफ्ट करीब ढाई साल पहले तैयार किया था। इसका मकसद शहर में बढ़ती गाड़ियों की संख्या पर लगाम लगाना था, लेकिन कई कमियों के चलते यह पॉलिसी अब तक अस्तित्व में नहीं आ सकी है।
उधर, हालात यह हैं कि शहर में अब पार्किंग के लिए जगह तक नहीं बचा है। लोग सड़क और फुटपाथ पर वाहन पार्क कर रहे हैं। ऐसे में प्रशासन ने एक बार फिर नई पार्किंग पॉलिसी को लागू करने की कवायद शुरू की है।
पार्किंग पॉलिसी के महत्वपूर्ण प्वाइंट
- पार्किंग पॉलिसी के ड्राफ्ट के मुताबिक, शहर में एक कनाल या उससे ऊपर के प्लाट के बाहर सड़क पर या सड़क के किनारे गाड़ी पार्क करने पर पूरी तरह पाबंदी होगी। ऐसे करने पर वाहन जब्त कर चालान करने का प्रावधान होगा।
- घर में पहले से अगर गाड़ी है और आप दूसरी गाड़ी खरीद रहे हैं, जिसकी कीमत 10 लाख रुपये से ऊपर है तो आपको गाड़ी की 50 प्रतिशत कीमत रोड टैक्स देनी होगी।
- चंडीगढ़ में गाड़ी खरीदने, चलाने और रजिस्टर्ड कराने के लिए सर्टिफिकेट ऑफ एंटाइटलमेंट देना होगा, जोकि 10 साल के लिए वैध होगा।
- जिन लोगों के पास गाड़ी नहीं है और उनके घर में पार्किंग एरिया है, वह अपने पार्किंग एरिया को किराए पर देकर कमाई कर सकते हैं।
- शहर के सभी स्कूल, कॉलेज, सरकारी व प्राइवेट संस्थानों को पिक एंड ड्रॉप ऑफ जोन डिक्लेयर करने होंगे। जहां पर स्कूल के बच्चों को छोड़ा जाएगा और वहां से लाया जाएगा।
- गाड़ी खरीदते समय लोगों को पार्किंग स्पेस सर्टिफिकेट देना होगा। अगर आपके पास गाड़ी पार्क करने की जगह नहीं होगी, तो आप अपनी गाड़ी की रजिस्ट्रेशन नहीं करा सकेंगे।
- चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा में रजिस्टर्ड वाहनों को छोड़कर अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों को पार्किंग के लिए 50 प्रतिशत अधिक पार्किंग फीस देनी होगी।
- जिन घरों में पार्किंग की पर्याप्त जगह है, उन्हें प्रापर्टी टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।
- पॉलिसी लागू होने के बाद वाहन मालिकों को तीन महीने के अंदर यह एफिडेविट देना होगा कि वे पॉलिसी के नियमों का पालन करेंगे।