चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी में रविवार को फ्रेंच विभाग के सभी कोर्स में आगामी सत्र में दाखिला नहीं करवाने का फैसला लिया गया है। विभाग की जैक की ओर से शिक्षक नहीं होने के कारण दाखिला बंद करने के प्रस्ताव को अनुमति दे दी गई है। पीयू में भाषा के नौ विभाग हैं। अंग्रेजी को छोड़कर सभी विभागों में दाखिले की स्थिति दयनीय है। रशियन विभाग में भी कोई शिक्षक नहीं है, इसका कार्यभार उर्दू विभाग के चेयरपर्सन को दिया गया है।
वहीं भाषा विभागों के कई कोर्स में किसी भी उम्मीदवार ने दाखिला ही नहीं लिया है। इसके कारण बहुत से कोर्स बंद होने की कगार पर आ गए हैं। हिंदी, संस्कृत और पंजाबी विषय में ही एमए की सीटें पिछले सालों में नहीं भर पा रही हैं। इसी कारण से इस सत्र में संस्कृत में सीटें कम की गई थीं, लेकिन इसके बावजूद 31 सीटें खाली रह गई हैं।
भाषा विभाग में संचालित कोर्स और सीटें व दाखिले की स्थिति
विभाग कोर्स कुल सीटें दाखिला लेने वाले विद्यार्थी
चाइनीज और तिब्बतीयन पीजी डिप्लोमा इन बौद्धिक स्टडीज 23 10
चाइनीज और तिब्बतीयन सर्टिफिकेट कोर्स इन चाइनीज 66 24
चाइनीज और तिब्बतीयन डिप्लोमा इन चाइनीज 35 6
चाइनीज और तिब्बतीयन एडवांस डिप्लोमा इन चाइनीज 29 4
चाइनीज और तिब्बतीयन सर्टिफिकेट इन तिब्बतीयन 66 10
चाइनीज और तिब्बतीयन डिप्लोमा इन तिब्बतीयन 20 0
चाइनीज और तिब्बतीयन डिप्लोमा इन प्रोफिशिएंसी 14 0
फॉर इंटरप्रीटेरशिप तिब्बतीयन
अंग्रेजी एमए 100 100
फ्रैंच सर्टिफिकेट कोर्स 230 178
फ्रैंच डिप्लोमा 58 12
फ्रैंच एडवांस डिप्लोमा 33 6
फ्रैंच एमए 20 14
जर्मन सर्टिफिकेट 140 80
जर्मन डिप्लोमा 35 13
जर्मन एडवांस डिप्लोमा 24 3
हिंदी एमए 78 59
हिंदी डिप्लोमा इन ट्रांसलेशन 78 24
पंजाबी एमए 78 47
पंजाबी डिप्लोमा इन ट्रांसलेशन 13 7
रशियन सर्टिफिकेट 131 42
रशियन डिप्लोमा 33 10
रशियन एडवांस डिप्लोमा 20 5
संस्कृत एमए 50 19
संस्कृत सर्टिफिकेट कोर्स इन उपनिषद् 30 15
उर्दू एमए 39 30
उर्दू सर्टिफिकेट कोर्स 98 61
उर्दू डिप्लोमा 26 6
उर्दू एडवांस डिप्लोमा 20 3
उर्दू सर्टिफिकेट कोर्स इन पर्शियन 33 26
शिक्षक नहीं होने के कारण छात्र नहीं ले रहे दाखिला
भाषा विभागों में शिक्षक ही नहीं रहे हैं। संस्कृत, चाइनीज एंड तिब्बतीयन और रशियन विभाग में शिक्षकों की आयु 60 वर्ष से ऊपर हो गई है। इनका चार्ज अन्य प्रोफेसर को मिला हुआ है। फ्रेंच में शिक्षक सेवानिवृत्त होने वाली हैं, जिसके बाद वहां कोई शिक्षक नहीं रहेगा। इसलिए भाषा विभागों में छात्र दाखिला भी नहीं रहे हैं।
-डॉ. अशोक कुमार, डीन, भाषा संकाय