ट्रांसफार्मर इंडस्ट्री घनघोर अंधेरे में है। उद्यमियों ने करोड़ों खर्च कर इंडस्ट्री तो लगा ली। लेकिन न तो औद्योगिक नीतियों ने उसे सपोर्ट किया, न ही कोई स्पेशल पैकेज मिला। ये उद्यमी ट्रांसफार्मर बनाते तो हैं लेकिन उन्हें ट्रांसफार्मर के खरीदार दूसरे राज्यों में जाकर ढूंढने पड़ते हैं।
पंचकूला में ट्रांसफार्मर इंडस्ट्री 20 साल से है। स्माल स्केल इंडस्ट्री लगाने वाले इन उद्यमियों ने इंडस्ट्री लगाई तो सोचा था कि अपने राज्य में ट्रांसफार्मर लगाने का मौका मिलेगा। जब इंडस्ट्री लगाई तो पता चला कि यहां तो कंडीशन ही टेढ़ी है। जिन पर खरा उतरना आम बात नहीं है। पहले एक ट्रांसफार्मर इंडस्ट्री में 50 से 60 लोगों को रोजगार मिला।
अब हाल यह है कि उद्यमियों ने सभी कर्मचारियों को हटा दिया है। खुद ही कई काम करने लगे हैं। करीब 500 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देने वाली यह इंडस्ट्री समय की मार झेल रही है।
स्कूल-कॉलेज का सहारा
इस इंडस्ट्री को सिर्फ बड़े इंस्टीट्यूशन, कॉलेज, स्कूल और संस्थानों का ही सहारा बचा है। सरकार द्वारा पचास किलोवाट से ज्यादा पावर के ट्रांसफार्मर की अनिवार्यता जारी करने के बाद यह स्थिति बनी है। जिससे इंडस्ट्री को थोड़ा सहारा मिला है। यहां भी यह इंडस्ट्री ज्यादा मुनाफा नहीं कमा पाती है।
ट्रांसफार्मर इंडस्ट्री-एक नजर
कुल इंडस्ट्री-5
कुल टर्नओवर-10 करोड़
रोजगार-50 व्यक्ति
6.3 केवीए से 3150 केवीए तक
पंचकूला में 6.3 केवीए से 3150 केवीए तक के ट्रांसफार्मर बनाए जाते हैं। यहां इनकी मेंटेनेंस भी की जाती है। इसके साथ ट्रांसफार्मर की रिपेयरिंग जॉब भी पंचकूला में होती है।
टर्नओवर का पंगा
उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के नियमों ने ट्रांसफार्मर इंडस्ट्री का हाल-बेहाल कर दिया है। नियम है कि जो भी टेंडर में भाग लेगा उसका टर्नओवर तीस करोड़ से ज्यादा हो। लेकिन यहां जो स्माल स्केल इंडस्ट्री हैं उनका टर्नओवर इस आंकड़े को छू नहीं सकता है। ऐसे में इंडस्ट्री तो टेंडर में भाग तक नहीं ले सकती है। उद्यमियों की मानें तो इस प्रकार के नियम रखकर एसएमई को खत्म किया जा रहा है।
बिजली की बाधा
पंचकूला में ट्रांसफार्मर इंडस्ट्री के लिए बिजली एक बड़ी बाधा बन चुकी है। ट्रांसफार्मर बनाने में ज्यादा काम बिजली का होता है। ऐसी स्थिति में महंगी बिजली इन उद्यमियों की कास्ट को बढ़ा देती है। एक उद्यमी के अनुसार पहले इसी बिजनेस में मुनाफा करीब 25 फीसदी था और अब प्रोडक्शन कास्ट ज्यादा होने के कारण मुनाफा सिर्फ दो फीसदी रह गया है।
एंट्री टैक्स की बाधा
पंचकूला की ट्रांसफार्मर इंडस्ट्री के लिए एंट्री टैक्स परेशानी बन गया है। हरियाणा में एंट्री टैक्स नहीं है। अन्य राज्यों ने अपने प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के लिए दूसरे राज्यों के लिए एंट्री टैक्स लगाया है। राजस्थान, पंजाब के साथ ही अन्य राज्यों में एंट्री टैक्स है।
पंजाब और राजस्थान में बाहर के वेंडर माल सप्लाई करते हैं तो उनको एंट्री टैक्स चुकाना पड़ता है। हरियाणा में ऐसा न होने से दूसरे राज्यों के वेंडर बेबाक सप्लाई करते हैं। जिससे राज्य की इंडस्ट्री खत्म होने के कगार पर है।
हम संकटकाल से होकर गुजर रहे हैं। हमारा संकट तभी खत्म होगा। जब सरकार कोई पैकेज या इंसेंटिव देगी। इसके साथ ही टेंडर में टर्नओवर की बाध्यता को भी खत्म किया जाना चाहिए।
- संजय गुप्ता, एसआर इंडस्ट्री
हमने ट्रांसफार्मर इंडस्ट्री लगा तो ली लेकिन बाध्यताओं की वजह से कई बार हम ट्रांसफार्मर तक नहीं बेच पाते हैं। बिजली निगम ने सरकारी टेंडरों में टर्नओवर की बाध्यता लगा दी है। जिसको स्माल स्केल इंडस्ट्री पूरा नहीं कर सकती हैं। ऐसी स्थिति में अब संघर्ष भी मुश्किल हो चला है।
- सचिन, उद्यमी पंचकूला
एक ओर सरकार स्माल स्केल इंडस्ट्री को बढ़ावा देने की बात करती है, दूसरी ओर कड़े नियम बनाती है। यह बात कहां तक सही है। हमारी इंडस्ट्री के लिए सरकार को स्पेशल पैकेज देना चाहिए या फिर इंसेटिंव। साथ ही सरकारी टेंडरों की बाधाओं को भी खत्म करना चाहिए।
- दीप्ती गर्ग, ट्रैंज मैट्रिक्स प्राइवेट लिमिटेड