करोड़ों फोटो खींचीं। पूरी दुनिया घूमी लेकिन सुकून तो अपने वतन में मिला। ये शब्द हैं पद्मश्री अवॉर्डी फोटोग्राफर रघु राय के। वह पंचकूला सेक्टर-3 स्थित एक निजी होटल में आयोजित दो दिवसीय पंचकूला आर्ट एंड लिटरेरी फेस्ट में शिरकत करने आए थे। पद्मश्री रघु राय ने अमर उजाला से बातचीत में जिंदगी के यादगार लम्हे साझे किए।
बचपन में बड़े होकर क्या बनना चाहते थे।
संगीतकार बनने का विचार था। कैसा बनूंगा ये नहीं मालूम था। पिता जी इंजीनियर बनाना चाहते थे। मेरे पिता इरीगेशन डिपार्टमेंट में सुपरिंटेेंडेंट थे। उन्होंने कहा तुझे क्या मीरासी बनना है। संगीत-वंगीत कुछ नहीं, उन्होंने मना कर दिया। पिता के ही कहने पर इंजीनियरिंग की और डेढ़-दो साल काम करने के बाद पंजाब से दिल्ली चला गया।
आपकी खींची पहली फोटो कौन-सी थी
पहली फोटो मेरे जहन में अब भी है। उस फोटो ने ही मुझे प्रसिद्ध बनाया। पहली फोटो हरियाणा के रोहतक जिले के पास एक गांव में गधे के बच्चे की खींची थी। उस दौरान मैं कुछ नहीं कर रहा था। मैंने अपने बड़े भाई जो फोटोग्राफर हैं। उन्हें कहा कि कैमरा दीजिए मैं भी फोटो खींचूंगा। उन्होंने एक फिल्म लोड कर कैमरा दे दिया। उस कैमरे से ही गधे के बच्चे की फोटो खींची। वापस आए तो बड़े भाई ने फोटो देखी और फोटो को सराहा।
क्या इसका कुछ मेहनताना भी मिला था
बड़े भइया ने लंदन टाइम्स को वह फोटो भेजी। उस दौरान लंदन टाइम्स वीकेंड पिक्चर आधे पेज का फोटो छापते थे। लंदन टाइम्स ने मेरे नाम से आधे पेज पर फोटो छापी थी और उस फोटो का करीब 30 पाउंड मुझे मिला था।
आपके नजरिए से फोटोग्राफी के क्या मायने हैं। क्या सिर्फ एक क्लिक ही फोटोग्राफी है।
एक क्लिक ही फोटोग्राफी हो सकती है। लेकिन वह कोई जरूरी नहीं है। क्लिक तो आज सभी कर ही रहे हैं। लेकिन उस क्लिक की अहमियत क्या है, वह फोटोग्राफी है।
फोटोग्राफी करते-करते कब सोचा कि अब फोटो बुक छापी जाए
1966 में फोटोग्राफी शुरू की थी। 1970 में एक्टिव जर्नलिज्म में आया। उसी वर्ष इंदिरा गांधी नई-नई प्रधानमंत्री बनी थीं। सबसे पहले इंदिरा गांधी से ही फोटो बुक की शुरुआत की थी। ‘ए डे इन द लाइफ ऑफ इंदिरा गांधी’ नाम की इस किताब का इंदिरा गांधी ने ही विमोचन किया था।
अब तक कितनी फोटो किताबें छाप चुके हैं। आगे किस विषय पर फोटो बुक छाप रहे हैं।
अब तक 60 के करीब फोटो छापी हैं। जहां तक अगली फोटो बुक का सवाल है तो वह दलाईलामा पर होगी । इसका नाम ‘ए होलीनेस इज दलाईलामा’।
इस जर्नी में आपके प्रेरणास्रोत कौन रहे। किससे आप बेहद प्रभावित हुए।
प्रकृति कितनी सुंदर है और जिंदगी इतनी लाजवाब है। वह चलती रहती है, किसी के लिए रुकती नहीं है। जो जिंदगी की रवानगी है। उसके जब दर्शन होते हैं तो बेहद प्रेरणा मिलती है। मुझे भी प्रेरणा वहीं से मिली।
74 की उम्र में काफी कुछ हासिल कर चुके हैं। कई अवॉर्ड् से सम्मानित हो चुके हैं। क्या कोई चाहत अधूरी है।
(हंसते हुए) जी! हां, बिल्कुल। अभी तो आसमान को नीचे उतार कर लाना है।
हर तरह की आप फोटोग्राफी करते हैं, लेकिन इंडस्ट्री और फैशन फोटोग्राफी नहीं करते, कोई खास वजह।
(हंसते हुए) फैशन फोटोग्राफी न-बाबा-न। देखिए, फैशन फोटोग्राफी काफी सटीक होती है। उसमें पोज करवाना पड़ता है, मैं कैंडिड फोटोग्राफी करता हूं, नेचर हो या फिर लाइव। पोज की हुई चीजें अच्छी नहीं लगती। क्योंकि वह आधी झूठी और आधी सच्ची लगती हैं। हम तो सच पकड़ने की कोशिश करते हैं।
ऐसा कौन सा देश है जो आपको बेहद अच्छा लगता है।
आई लव माई इंडिया। अपना देश ही मुझे भाता है। यहां हर तरह के रंग देखने को मिलेंगे। चाहे वह झगड़ा हो या फिर आपसी प्यार-सौहार्द।
मोबाइल से फोटोग्राफी की कब सूझी
अगस्त 2015 में जियोनी कंपनी ने मुझे प्रोजेक्ट के लिए ऑफर किया था। इस कंपनी ने जो सेलफोन बनाया, उसकी कैमरा क्वालिटी अच्छी थी। सारा खर्च भी वह ही उठा रहे थे। ऑफर अच्छा तो कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक घूमे। फोटोज क्लिक किए और उसके बाद इंडिया थ्रो द आइज ऑफ रघु राय के नाम से किताब प्रकाशित हुई।