सेक्टर-10 के डीएवी कॉलेज में शनिवार को दुर्लभ डाक टिकट संग्रह प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ। एडवाइजर विजय कुमार देव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर इसका शुभारंभ किया। यह प्रदर्शनी नौ फरवरी तक चलेगा।
डाक विभाग की ओर से चार दिवसीय (6 फरवरी से नौ फरवरी) सेक्टर-10 स्थित डीएवी कॉलेज में राज्य स्तरीय टिकट संग्रह प्रदर्शनी ‘पनपैक्स-2016’ का शुभारंभ हुआ। इस प्रदर्शनी में विभिन्न तरह के टिकटों का कलेक्शन है।
इस अवसर पर चंडीगढ़ ग्रुप ऑफ कॉलेज के प्रेजिडेंट आरएस धालीवाल, डीएवी कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ बीसी जोसन, चीफ पोस्टमास्टर जनरल पंजाब सर्किल अचला भटनागर, डायरेक्टर पोस्टल सर्विसेज मनीषा बंसल बादल और मीनाक्षी यादव, एसएसपीओज चंडीगढ़ डिविजन राधिका धीर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित हुए।
कार्यक्रम में डायरेक्टर डाक सेवाएं मनीषा बंसल ने बताया कि विभाग की ओर से आयोजित इस प्रदर्शनी में 300 से भी अधिक डिस्पले फ्रेम रखे गए हैं। एक फ्रेम में करीब 32 टिकट प्रदर्शित की की गई है।
प्रदर्शनी में प्रसिद्घ शख्सियतों, ऐतिहासिक धरोहरों, हेरिटेज, कल्चर आदि पर आधारित दुर्लभ डाक टिकटों का संग्रह शामिल है। कार्यक्रम में स्कूली बच्चों के लिए अलग-अलग प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जा रही हैं।
इनमें कल्चरल, पत्र लेखन, स्टैंप डिजाइन पर वर्कशॉप, स्टेंप डिजाइन आधारित प्रतियोगिताएं हैं। ये 3 वर्ग में अलग-अलग थीम पर आधारित हैं। पहली क्लास 1 से 5 तक जिसकी थीम होलीहै। वहीं दूसरे वर्ग में क्लास 6 से 8 तक के स्टूडेंट्स होंगे जो ‘पतंग उड़ाना’ थीम पर और तीसरे वर्ग में क्लास 9 से 12 तक के स्टूडेंट्स शामिल होंगे। इनकी थीम फोक डांस है।
अपनी स्टैंप भी बनवा सकेंगे
डायरेक्टर मनीषा बंसल के अनुसार प्रदर्शनी में ‘माई स्टैंप’ का विशेष काउंटर होगा। यहां आने वाले लोग खुद की डाक टिकट भी बनवा सकेंगे। इसके लिए विभाग उनसे केवल 300 रुपये लेगा। साथ ही इस चार दिवसीय कार्यक्रम में होने वाली सभी प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी उनकी फोटो वाली डाक टिकट गिफ्ट की जाएंगी।
आजाद भारत का पहला डाक टिकट प्राइड ऑफ इंडिया का भी प्रदर्शन किया गया है। फिरोजपुर से आए सुरजीत सिंह बावा ने बताया कि वे जब आठवीं में पढ़ते थे तभी से वे टिकटें एकत्र करना शुरू कर दिया था। उनके पास 1852 का भी डाक टिकट है। उनके अनुसार बच्चों की तरह इन्हें संभालकर रखना पड़ता है।
चंडीगढ़ के सेक्टर-3 निवासी महेंद्र सिंह ने महात्मा गांधी और सिखिज्म पर डाक टिकटों को संजोया है। वे अपने पिताजी की आई चिटिठयों की टिकटें निकालकर रखना शुरू किया था।
चंडीगढ़ निवासी अवनाश सिंह लुथरा ने भी अपनी पुरानी और दुर्लभ टिकटें प्रदर्शित की हैं। उनके पास 1840 की क्वीन विक्टोरियो की फोटोवाली डाक टिकट है। लुथरा ने द्वितीय विश्वयुद्ध के समय फौजियों की सेंसर्ड चिट्ठियों को भी प्रदर्शित किया गया है। फौजियों की चिट्ठियों का पहले पढ़कर उसे उनके घर या उन्हें दिया जाता था। सेंसर यूनिट की मुहर के साथ भी प्रदर्शित की गई है।
प्रबल फके ने ग्वालियर स्टेट की 1885 से लेकर 1950 तक की डाक टिकटों प्रदर्शनी में लगाए हैं। इसमें क्वीन विक्टोरिया, किंग एडवर्ड-7 और किंग जार्ज-5 शामिल हैं।
फिलेटिक स्टॉ्ल भी लगाए हैं...
प्रदर्शनी में फिलेटिक स्टॉल भी लगाए गए हैं। इन स्टॉल पर बुकमार्क, कुशन, पेपरवेट, दीवाल घड़ी, मग में दुर्लभ टिकटों वाली वस्तुएं हैं। गांधीजी जी की चरखा वाली दीवाल घड़ी या अदाकारा मधुबाला की फोटोवाली डाक टिकट की पेवरवेट लोगों को पसंद बना हुआ है।
मदर टेरेसा की डाक टिकट की टीशर्ट को युवाओं ने खरीदा। हरकारा भी अपने ड्रेस में दिखा। पुराने जमाने में हरकारा ही डाक लेकर बांटने जाते थे। उनके हाथों में लालटेन, डाक से भरी बैग और लाथी में घुंघरू लगी होती थी।