यूटी प्रशासन ने चंडीगढ़ के ड्राफ्ट मास्टर प्लान-2031 को लेकर गठित बोर्ड ऑफ इंक्वायरी की ओर से ओवरब्रिज बनाए जाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।
अब यूटी के प्रशासक के सलाहकार समिति की 19 जून को होने वाली बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा होगी। बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि सेक्टोरल ग्रिड के बाहर ओवरब्रिज बनाए जाएं। इसके साथ अंडरपास भी बनाए जाएं। प्रशासन दोनों विकल्पों पर विचार कर अपनी प्राथमिकता को तय कर सकता है।
बोर्ड की रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन ने तय किया है कि चंडीगढ़ में ओवरब्रिज नहीं बनेंगे और जहां पर जरूरत होगी वहां अंडरपास बनेंगे।
प्रशासन ने वर्ष 2007 में शहर में 11 अंडरपास बनाने की योजना तैयार की थी। बाद में इनकी संख्या कम करके 8 कर दी गई। अंडरपास प्रोजेक्ट के लिए चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड को नोडल एजेंसी बनाया गया था, लेकिन फंड और स्टाफ की दिक्कत के कारण अंडरपास प्रोजेक्ट शुरू ही नहीं हो पाया।
सीएचबी ने तीन साल पहले तीन अंडरपास के लिए टेक्निकल बिड भी आमंत्रित की थी, लेकिन उस पर भी कुछ नहीं हो पाया। बाद में सीएचबी ने प्रशासन से अंडरपास के लिए फंड जुटाने को कहा। अब नगर निगम नए सिरे से शहर में अंडरपास बनाने के प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी उठा रहा है।
रिंग रोड बनाने की योजना हो तैयार
शहर में बढ़ते ट्रैफिक को लेकर बोर्ड को कई सुझाव मिले थे। गमाडा और पंजाब के चीफ टाउन प्लानर ने भी सुझाव दिए थे। पंजाब सरकार के साथ-साथ हरियाणा सरकार ने भी अपने सुझाव दिए थे।
इन सुझावों पर प्रशासन ने फैसला लिया है कि रोड कनेक्टिविटी को लेकर पंजाब और हरियाणा से जो भी सुझाव आए हैं उन्हें स्वीकर कर लिया जाए। पंजाब और हरियाणा जाने वाला ट्रैफिक चंडीगढ़ में प्रवेश न करे इसके लिए रिंग रोड बनाने की योजना बनाए जाए।