सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आरएम लोढा ने कहा कि महिलाओं के सहयोग के बिना किसी भी देश का विकास संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि जिस देश में महिलाओं पर अत्याचार हो रहे हैं और उसे बेइज्जत किया जा रहा है, वहां कि तरक्की किसी भी सूरत में संभव नहीं।
जस्टिस आरएम लोढा चंडीगढ़ स्थित ज्यूडिशियल अकादमी में वुमन राइट आर ह्यूमन राइट विषय पर आयोजित सेमिनार में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि 1971 से 2012 तक महिलाओं के खिलाफ मामलों में 902 फीसदी इजाफा हुआ है, जबकि पनिशमेंट रेट तेजी से नीचे गिरा है। 2011 में पनिशमेंट रेट 26.4 था, वहीं 2012 में यह घटकर 24.2 पर पहुंच गया।
उन्होंने कहा कि हमारा सामाजिक ढांचा महिलाओं से भेदभाव के लिए जिम्मेवार है। उन्होंने कहा कि हमें ग्रामीण क्षेत्रों में रह रही महिलाओं के संबंध में सोचने की ज्यादा जरूरत है और उसके लिए लोगों की सोच में बदलाव लाना होगा।
इस मौके पर जस्टिस डॉ. बीएस चौहान ने कहा कि हमारे देश में महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के संबंध में अच्छे कानून हैं, लेकिन लोगों की सोच के बदौलत इनका फायदा नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने कहा कि कानून सभी समस्याओं का हल हो सकता है, लेकिन यह बहुत धीमी गति से चलता है।
इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस रंजना पी देसाई, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय किशन कौल, हाईकोर्ट के जस्टिस जसबीर सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रामण्यम ने भी अपने विचार रखे।
महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण में सहयोग दे न्यायपालिका: हुड्डा
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने न्यायपालिकाओं से आग्रह किया है कि वे महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण में सहयोग दें, ताकि महिला उत्थान की दिशा में उठाई जा रही योजनाओं को बल मिले।
उन्होंने कहा कि आज लोगों की मानसिकता बदलने की जरूरत है और यह कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णयों से ही हो सकता है। मुख्यमंत्री हुड्डा चंडीगढ़ स्थित ज्यूडिशियल अकादमी में महिला अधिकार ही मानव अधिकार विषय पर आयोजित सेमिनार में बोल रहे थे।
इस दौरान उन्होंने हरियाणा प्रदेश में महिलाओं के हित और न्याय के लिए किए गए सरकारी प्रयासों की जानकारी दी।