यूटी विजिलेंस ने डीसी के पीए राकेश मोहन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए है। सेक्टर-33 की एक कोठी मंजीत कौर नाम की महिला को अलॉट की गई थी। मंजीत ने इस कोठी के एवज में 10 फीसदी किस्त भी जमा करा दी थी। बाद की किस्तें जमा न होने के कारण एस्टेट आफिस की ओर से इस कोठी की अलॉटमेंट को रद्द करने के आर्डर जारी कर दिए थे।
वर्ष 2008 में दोबारा से प्लाट की अलॉटमेंट के लिए नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई। ये मामला हाईकोर्ट तक गया। हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन के दोबारा कोठी के अलॉटमेंट को लेकर नीलामी प्रक्रिया पर स्टे लगा दी थी और यूटी प्रशासन को जवाब दाखिल करने के लिए कहा। जब इस मामले से जुड़ी फाइल हाईकोर्ट में पेश करने की बारी आई तो एस्टेट आफिस से यह फाइल गायब की जा चुकी थी।
एस्टेट आफिस के रिकॉर्ड में यह फाइल आखिरी बार तत्कालीन डीसी के पीए रहे राकेश मोहन के पास थी। खुलासे के बाद विभागीय जांच शुरू हुई। फाइल गुम होने की वजह से प्रशासन को हाईकोर्ट से भी फटकार खानी पड़ी थी। आज इस मामले में यूटी के चीफ विजिलेंस आफिसर ने राकेश मोहन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने को कहा है। इस मामले में गवर्नर लेवल पर आदेश जारी कर एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए गए हैं।
राकेश मोहन को डीसी के पीए से हटाया, सचिन शर्मा को लगाया
डीसी अजित बालाजी जोशी ने इस कार्रवाई के बाद पीए के पद पर तैनात राकेश मोहन को हटा दिया है। अब उनकी जगह लेबर डिपार्टमेंट के सीनियर असिस्टेंट के तौर पर काम कर रहे सचिन शर्मा को पीए के पोस्ट पर नियुक्त किया गया है। इसके अलावा असिस्टेंट इस्टेट आफिसर के पर्सनल स्टाफ से ज्योति को भी पर्सनल स्टाफ में लगाया गया है। चीफ विजिलेंस आफिसर के एफआईआर दर्ज करने के आदेश के बाद से ही राकेश मोहन छुट्टी पर चल रहे हैं। सूत्रों की मानें तो शुक्रवार देर शाम तक एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।
गवर्नर लेवल पर इस केस में एफआईआर दर्ज करने के आदेश हुए हैं। जल्द ही इस मामले से जुड़े लोगों पर एफआईआर दर्ज होगी।
- बीएल शर्मा, सेक्रेटरी यूटी विजिलेंस