आधा जीवन इन्साफ की लड़ाई लड़ने वाली बर्खास्त महिला कर्मी को सेवानिवृत्ति की आयु पूरी होने के 11 महीने बाद इन्साफ मिला है। हाईकोर्ट ने 28 साल पहले जारी बर्खास्तगी के आदेश को रद्द करते हुए कि कहा कि 1987 में नियुक्ति की तिथि से उसे क्लर्क माना जाए। 1997 से उसे नियमित किया जाए और इस अवधि के वेतन, इंक्रीमेंट और पदोन्नति व सेवानिवृत्ति से जुड़े सभी लाभ जारी किए जाएं।
आदेश का पालन करने के लिए हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को तीन महीने की मोहलत दी है। याचिका दाखिल करते हुए रूपिंदर कौर ने एडवोकेट विकास सिंह के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि वह 13 अक्तूबर, 1987 को कृषि विभाग में डेली वेज क्लर्क नियुक्त हुई थीं। इसके बाद 1989 में उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। इस आदेश को उन्होंने कपूरथला लेबर कोर्ट में चुनौती दी थी। अदालत ने उन्हें 20 मार्च, 1991 से बहाल करने और सेवा लाभ देने का आदेश दिया था।
इसके बाद याची को 1 नवंबर, 1994 को बहाल कर दिया गया, लेकिन डेली वेज लेबर के तौर पर सेवा में रखा। 31 जनवरी, 1995 को उन्हें यह कहते हुए बर्खास्त कर दिया गया कि लेबर के लिए विभाग में कार्य नहीं है। इस आदेश को याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
पंजाब सरकार का रवैया ठीक नहीं...
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि इस मामले में पंजाब सरकार का रवैया ठीक नहीं था। याची को जब टाइपिस्ट के तौर पर नौकरी दी गई थी तो कैसे उसे अदालत के आदेश पर बहाल करते हुए डेली वेज लेबर के तौर पर जॉइन करवाया गया। लेबर के लिए विभाग में काम नहीं था। इस आधार पर याची को बर्खास्त किया गया, लेकिन टाइपिस्ट के लिए काम नहीं था ऐसा कोई प्रमाण विभाग ने पेश नहीं किया।