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नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर का विरोध शुरु, पूर्व विधायक कंवर संधू ने प्रशासक से की शिकायत

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चंडीगढ़। यूटी प्रशासन ने कांसल फॉरेस्ट एरिया में नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर का निर्माण किया है। पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित ने बुधवार को इसका उद्घाटन किया। इसे लेकर खरड़ के पूर्व विधायक कंवर संधू ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस सेंटर के लिए पंजाब वन विभाग व अन्य अधिकारियों को विश्वास में नहीं लिया गया। संधू ने इस बारे में प्रशासक को शिकायत पत्र लिखा है।
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पत्र में संधू ने कहा है कि यूटी प्रशासन के अधिकारी जमीनी स्तर की हकीकत की तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं। चंडीगढ़ और पंजाब के बीच पहले ही इको सेंसिटिव जोन को लेकर गतिरोध चल रहा है। इसका कारण यह है कि यूटी प्रशासन सुखना वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के एक किलोमीटर के एरिया को इको सेंसिटिव जोन घोषित करने बना रहा है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ ने वर्ष 1998 में इस एरिया को वाइल्ड लाइफ सेंचुरी घोषित करने से पहले भी पंजाब और हरियाणा की सलाह नहीं ली, हालांकि पंजाब की तरफ से इसे लेकर विरोध नहीं किया गया। अब सुखना वाइल्ड लाइफ के एरिया में सॉइल कंजर्वेशन को लेकर जो फैसला लिया गया है वह भी सही नहीं है। ये नयागांव मास्टर प्लान के अंदर कांसल गांव के विकास के लिए योजना को भी प्रभावित करेगा। संधू ने पत्र में कहा कि जब वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को बाड़ से कवर किया गया है तो वन्यजीवों को कोई खतरा नहीं है, इसलिए यहां पर जीरो इको सेंसिटिव जोन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल व कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी इसे लेकर केंद्र सरकार को पंजाब का रुख स्पष्ट किया था। उन्होंने अब मुख्यमंत्री भगवंत मान से भी केंद्र के समक्ष ये मुद्दा उठाने की अपील की है। उन्होंने पंजाब के राज्यपाल व यूटी प्रशासक से मांग की कि वह इस मामले में दखल देकर इसका समाधान करवाएं।
इको सेंसिटिव जोन बनाने पर कई वर्षों से चल रहा है गतिरोध
सुखना वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के संरक्षण के लिए यूटी प्रशासन पिछले काफी समय से पंजाब-हरियाणा राज्यों में आने वाले एरिया को इको सेंसिटिव जोन घोषित करने की मांग कर रहा है। पिछले वर्ष प्रशासन ने जोनल काउंसिल सब कमेटी की बैठक में भी ये मुद्दा उठाया था और जल्द ही इस पर कार्रवाई करने की अपील की थी। बता दें कि यूटी प्रशासन ने सुखना वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर बनाया है। इसमें सुखना कैचमेंट, मिट्टी एवं नमी संरक्षण कार्यों के प्रभाव का चित्रण, जानवरों के थ्रीडी मॉडल, पक्षियों-तितलियों और विभिन्न जीवों की प्रजातियों पर पोस्टर, फूलों की अलग-अलग किस्मों के बारे में जानकारी मिलेगी।
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