हरियाणा रोडवेज के बेड़े में 809 बसें शामिल करना परिवहन विभाग के गले की फांस बन गया है। मार्च अंत तक इनमें से आधी बसों को सड़कों पर उतारने का दावा पूरा होता नहीं दिख रहा। हरियाणा रोडवेज इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन में अभी तक 58 चेसिस ही आई हैं। इन्हें भी चार महीने पहले खरीदा गया था। इनमें 29 अशोक लेलैंड व 26 टाटा कंपनी की हैं। इनमें से दो पर सैंपल बसें ही अब तक तैयार हुई हैं।
इसके पीछे सबसे बड़ा कारण कॉरपोरेशन के पास बसें बनाने के लिए धातु और मजदूर न होना है। कर्मचारी खाली बैठे हैं। कंपनियों से धातु व अन्य निर्माण सामग्री, मजदूर लेने का प्रस्ताव छह-छह, सात-सात बार हाई पावर परचेज कमेटी में औंधे मुंह गिर चुका है। विभाग निजी कंपनियों से पुराने रेट पर निर्माण सामग्री व मजदूर चाह रहा है, जिस पर सहमति नहीं बन पा रही। इससे बसें बनाने का काम अटक गया है। कर्मचारी बसें नहीं बना पा रहे, जिससे उन्हें तीन-चार महीने से वेतन ही नहीं मिला।
परिवहन विभाग जीएसटी लागू होने से पहले के रेट पर यूरो-6 बसों को तैयार करने के लिए निर्माण सामग्री चाह रहा है। ठेकेदारों से टेंडर के लिए बसें बनाने को लिए जाने वाले 200-300 मजदूर भी पुरानी दिहाड़ी पर मांगे जा रहे हैं, जिससे कोई कंपनी या ठेकेदार आगे नहीं आ रहा। एचआरईसी में चेसिस पर आधी गाड़ी खुद बनाई जाती है, आधी ठेकेदार के मजदूर बनाते हैं। यही कारण है कि एचआरईसी में और चेसिस नहीं मंगवाई जा रहीं। चूंकि, चेसिस आने के 40 दिन के अंदर कंपनी को पैसा देना होता है। एक बस की चेसिस 15 लाख में आ रही है।
पुराना माल काट-काटकर बनाई सैंपल बसें
एचआरईसी में दो सैंपल बसों को बनाने के लिए कर्मियों ने पुराना माल काट-काटकर लगाया। 60 एमएम गुणा 40 एमएम व 40 एमएम गुणा 40 एमएम की पाइप ही नहीं हैं। सैंपल बसें तैयार करने में चार महीने लग गए। निर्माण सामग्री मिलने के बाद कॉरपोरेशन कर्मी और ठेकेदार मिलकर पहले एक महीने में 20 फिर 30 और उसके बाद 40-50 बसें भी एक महीने में बना सकते हैं। कॉरपोरेशन शुरू होने पर 500 स्टाफ था, उस समय एक महीने में 105 बसें भी बनी थीं। अब सिर्फ 75 कर्मचारी ही रह गए हैं। पांच साल पहले इनकी संख्या 250 थी।
जल्द दिलाएंगे धातु और अन्य सामग्री, बनी-बनाई बसें भी खरीदेंगे: मूल चंद
परिवहन मंत्री मूल चंद शर्मा ने कहा कि नई बसें जल्दी सड़कों पर उतारने के लिए प्रयासरत हैं। एचआरईसी को धातु, अन्य उपकरण व ठेकेदार से मजदूर दिलाने के लिए परिवहन विभाग अनेक कंपनियों से बातचीत कर रहा है। आने वाले समय में सारी कमियां पूरी कर दी जाएंगी। 809 बसें के अलावा 2023 तक 2500 बसें रोडवेज बेड़े में शामिल करने का लक्ष्य है। विभाग की योजना है कि चेसिस के बजाय बनी बनाई बसें ही निजी कंपनियों से खरीदें। इस पर सरकार विचार कर रही है।