वर्ल्ड कार फ्री डे पर बुधवार को सलाहकार धर्मपाल और आयुक्त आनिंदिता मित्रा साइकिल से दफ्तर पहुंचीं। वहीं निगम के कर्मचारी भी साइकिल चलाकर दफ्तर आते दिखे लेकिन प्रशासन के कई कर्मचारी व अफसर गाड़ियों से ही दफ्तर पहुंचे। उनका कहना है कि दिनभर में काफी बैठकें हैं। सभी जगह साइकिल से जाना संभव नहीं है।
सलाहकार धर्मपाल साइकिल ट्रैक व साइक्लिंग के प्रति शहरवासियों की रुचि देखकर काफी प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ के लोगों के लिए काफी अच्छी सुविधा है। वह इसे प्रोत्साहित करेंगे ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग पेट्रोल-डीजल की गाड़ियों छोड़ साइकिल की सवारी करें। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को इसके लिए पहल करनी होगी, ताकि दूसरे लोगों के लिए उदाहरण बन सकें।
बता दें कि धर्मपाल ने बीते दिनों निर्देश दिया था कि सभी अधिकारी हफ्ते में एक दिन साइकिल से दफ्तर पहुंचेंगे लेकिन इस प्रस्ताव को फिललाल टाल दिया गया है। उनका कहना है कि अधिकारियों के साथ इस पर चर्चा हुई थी लेकिन कई बार अचानक बैठकों में पहुंचना होता है, ऐसे में साइकिल से पहुंचना संभव नहीं है। वहीं निगम व स्मार्ट सिटी की ओर से भी सभी को साइकिल से आने के निर्देश जारी हुए थे।
मार्च 2018 में हर बुधवार साइकिल से आने का जारी हुआ था आदेश
मार्च 2018 में नगर निगम के तत्कालीन कमिश्नर जतिंदर यादव ने एक आदेश जारी कर हर बुधवार को कर्मचारी व अधिकारियों के लिए साइकिल से आना अनिवार्य किया था। पहले ही दिन आदेश का पालन नहीं हुआ और अधिकतर कर्मी अपने वाहनों से ही निगम पहुंचे थे। इन कर्मियों ने अपनी गाड़ी को निगम ऑफिस की पार्किंग में न खड़े कर के निगम ऑफिस के सामने वाली पार्किंग में खड़ा किया और वहां से फिर पैदल आए थे। कुछ महिला कर्मियों को उनके परिजन दोपहिया और चौपहिया वाहनों पर निगम ऑफिस के सामने छोड़ कर गए थे। कुछ दिनों बाद ये योजना पूरी तरह से फेल हो गई।