हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल।
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करोड़ों रुपये के घाटे में चल रहे हरियाणा पर्यटन निगम को लाभ में लाने का खाका तैयार कर लिया गया है। एक से डेढ़ साल में निगम को लाभ में लाने की योजना पर्यटन विभाग के अफसरों ने बनाई है। कोरोना के कारण और आर्थिक तंगी आने पर सरकार ने निगम को 35 करोड़ का अनुदान दिया है। जिससे कर्मचारियों को तीन-चार महीने का रुका हुआ वेतन, ग्रेच्युटी व लीव इनकैशमेंट की राशि दी गई।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल के निर्देश पर पर्यटन निगम के प्रधान सचिव एमडी सिन्हा ने लीज पॉलिसी भी तैयार करवाई है। विभाग स्तर पर गठित समिति ने पॉलिसी को अंतिम रूप देकर मंजूरी के लिए उच्च अधिकारियों को भेज दिया है। इस पॉलिसी को मुख्यमंत्री की हरी झंडी मिलते ही विभाग घाटे में चल रहे अपने परिसर, होटल व रेस्तरां को लीज पर देने की प्रक्रिया शुरू करेगा, जिससे कि मुनाफा कमाया जा सके।
कोरोना के कारण दो साल से निगम परिसर, होटल, रेस्तरां इत्यादि अधिकांश बंद ही रहे। जिससे निगम को आय ही नहीं हुई। आय का कोई निरंतर स्रोत न होने पर निगम के सामने बड़ा वित्तीय संकट उत्पन्न हो गया।
इससे कार्यरत कर्मचारियों का तो वेतन रुका ही, सेवानिवृत्त होने वाले कर्मियों की ग्रेच्युटी व लीव इनकैशमेंट का पैसा भी फंस गया। कर्मचारियों के मुद्दा बनाने पर पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव एमडी सिन्हा ने पूरा मामला मुख्यमंत्री मनोहर लाल के समक्ष उठाया। आंकड़ों के साथ पूरी स्थिति बताने पर उन्होंने तुरंत 35 करोड़ रुपये का अनुदान देने के आदेश जारी कर दिया।
इस माह के अंतिम सप्ताह में दो अहम बैठकें
पर्यटन निगम को घाटे से उबारने व भविष्य में मुनाफे की स्थिति में लाने के लिए इस माह के अंतिम सप्ताह में दो अहम बैठकें होने जा रही हैं। पहली बैठक 26 व दूसरी 28 जुलाई को प्रस्तावित है। इसमें एक बैठक निगम के निदेशक मंडल की भी है। जिसमें पूरा लेखा-जोखा रखा जाएगा। बैठक में पर्यटन मंत्री कंवर पाल के अलावा निगम के चेयरमैन रणधीर गोलन भी हिस्सा ले सकते हैं। मंत्री व चेयरमैन में छत्तीस का आंकड़ा है, ऐसे में गोलन बैठक में नहीं पहुंचते हैं तो कोई बड़ी बात नहीं होगी।