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नर्सिंग छात्राओं के आंदोलन के आगे झुकी सरकार, मिलेगी राहत

Sun, 28 Jun 2015 08:45 AM IST
मोहित धुपड़/अमर उजाला, अंबाला सिटी
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पिछले कई दिनों से दांव पर लगा अपना भविष्य बचाने के लिए संघर्ष कर रही नर्सिंग छात्राओं के आंदोलन के आगे अब सरकार झुक गई है। नए सिरे से दोबारा परीक्षा देने की जिद पर अड़ी सरकार अब इन नर्सिंग छात्राओं को कुछ हद तक राहत देने के मूड में है।
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हजारों छात्राओं के भविष्य के लिए सरकार अब संजीदा नजर आने लगी है। इन छात्राओं के लिए ये व्यवस्था की जा रही है कि इनकी अधर में लटकी मौजूदा पढ़ाई और परीक्षा भी डिस्टर्ब न हो और ये छात्राएं इन दुकान रूपी नर्सिंग स्कूलों व कॉलेजों के चंगुल से भी बच जाए।

इसके लिए बाकायदा सरकार की ओर से कवायद शुरू कर दी गई है। ऐसा आश्वासन स्वास्थ्य मंत्री ने भी दिया है। आने वाले दो से तीन दिनों में इन नर्सिंग छात्राओं को राहत मिल जाएगी।
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मामले को सुलझाने को विशेष टीम गठित

इसके लिए सूबे के सेहत मंत्री अनिल विज ने आला अफसरों वाली एक विशेष कमेटी का गठन कर दिया है। ये अफसर इस पूरे मामले में मंथन कर इस बात का तोड़ निकाल रहे हैं कि किस तरह से प्रदेश में गैर कानूनी ढंग से खुले नर्सिंग स्कूल व कॉलेजों पर शिकंजा भी कसा जाए और साथ ही इन शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ रही छात्राओं को राहत भी दी जाए।

सूत्र बताते हैं कि सरकार प्रदेश में अवैध रूप से चल रहे नर्सिंग स्कूलों व कॉलेजों को तो राहत देने के मूड में नहीं है, मगर इस बात पर मंथन जरूर कर रही है कि इस मसले में उन आठ हजार छात्राओं का, जो जानकारी के अभाव में इन अवैध स्कूलों व कॉलेजों से लाखों रुपये देकर नर्सिंग (एएनएम व जीएनएम) कोर्स कर रही हैं, का भविष्य कैसे बचाया जाए?

इसलिए जल्द ही स्वास्थ्य मंत्री ऐसा रास्ता निकलवा रहे हैं, जिससे इन छात्राओं की मौजूदा पढ़ाई का भी ज्यादा हर्जा न हो और अवैध रूप से बने नर्सिंग शैक्षणिक संस्थानों पर भी शिकंजा कसा जाए।
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सड़कों तक नर्सिंग स्टूडेंट्स का संघर्ष

पूरे प्रदेश भर में करीबन अस्सी नर्सिंग स्कूल ऐसे हैं, जिन्हें न तो प्रदेश सरकार की और न ही इंडियन नर्सिंग काउंसिल की मान्यता प्राप्त है। यहां अभी आठ हजार के करीब छात्राएं जीएनएम व एएनएम कोर्स कर रही हैं।
- सरकार ने इन संस्थानों को गैर कानूनी बताने के बाद इन शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, क्योंकि परीक्षा किसी अधिकृत बोर्ड के जरिए नहीं हुई
- अब ऐसे में इन स्कूलों के अंतर्गत पढ़ाई कर रही नर्सिंग कोर्स करने वाली छात्राओं का भविष्य दांव पर लग गया है
- अपना फैसला वापस लेने के लिए इन छात्राओं ने स्कूल को छोड़ सड़कों पर संघर्ष शुरू कर दिया
- विज की कोठी पर लगातार धरना जारी रहा, चंडीगढ़ में आला अफसरों के कार्यालय में भी घेराव किया
- मंत्री विज से भी मिलकर नर्सिंग छात्राओं ने अपना भविष्य खराब न करने की गुहार लगाई
- मंत्री विज के हाथ खड़े करने पर नेशनल हाइवे नंबर एक जाम कर दिया, उसके बाद पुलिस की जबरदस्त बर्बरता को भी झेला
- अब छात्राओं ने सीएम सिटी करनाल में भी संघर्ष शुरू कर दिया है। जिसके बाद अब सरकार को झुकना पड़ा है, क्योंकि प्रदेश के छात्र वर्ग में इस घटना के बाद एकदम सरकार के प्रति रोष व्याप्त हो गया है।

नर्सिंग स्कूल व कॉलेज गैर कानूनी हैं, छात्राएं इस बात को समझें, वहां से मिली डिग्री भी अवैध होगी। मैं भी छात्राओं की बात को समझ रहा हूं। इसलिए उनका भविष्य खराब न हो, इसके लिए कवायद शुरू करवा दी है। अफसरों की विशेष कमेटी ने इस मसले पर मंथन शुरू कर छात्राओं को राहत देने का काम भी शुरू कर दिया है। छात्राएं हौसला रखें, दो-तीन दिन में उन्हें राहत मिलेगी।
-अनिल विज, स्वास्थ्य मंत्री, अंबाला
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