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वेतन विसंगति के विरोध में नर्सिंग स्टाफ ने शुरू किया हस्ताक्षर अभियान

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चंडीगढ़। यूटी चंडीगढ़ नर्सिंग स्टाफ ने 1992 की अधिसूचना के कारण पंजाब सिविल सर्विसेज रूल्स एवं पंजाब पे स्केल की वजह से हो रही वेतन संबंधित विभिन्न समस्याओं के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान शुरू कर दिया है। इस क्रम में जीएमएसएच-16 में वीरवार को अभियान की शुरुआत की गई।
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जीएमएसएच-16 नर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष परमिंदर जीत थिंड व सचिव शोभना पठानिया का कहना है कि कोरोना काल में नर्सिंग स्टाफ ने एक योद्धा के रूप में प्रथम पंक्ति में खड़े होकर अपनी और अपने परिवार की परवाह किए बिना मरीजों की सेवा की। हमारी योगदान को पहचानते हुए हमें सम्मानित भी किया गया है। अब यूटी चंडीगढ़ के नर्सिंग स्टाफ चाहती हैं कि यहां भी देश के अन्य केंद्र शासित प्रदेशों की तरह भारत सरकार के नियमों को लागू किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि अन्य सरकारी अस्पताल एवं केंद्र शासित अस्पतालों में नर्सिंग स्टाफ 80000 रुपये प्रति माह का वेतन ले रही हैं। वहीं चंडीगढ़ नर्सिंग स्टाफ दूसरे केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में हर महीने लगभग 30,000 रुपये का वेतन में नुकसान सह रही हैं। इसके अलावा नौकरी के दौरान कोई वित्तीय अपग्रेडेशन नहीं किया जा रहा, पदोन्नति भी नहीं दी जा रही है। नर्सिंग स्टाफ के लिए केंद्र द्वारा दिए जा रहे विशेष भत्ते भी पंजाब के नियम के कारण हमें नहीं मिल पा रहे हैं। वही सेवानिवृत्ति की उम्र भी बिना किसी एक्सटेंशन के 60 साल से घटाकर 58 साल कर दी गई है, इसलिए नर्सिंग स्टाफ प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित से चंडीगढ़ में सेंट्रल सिविल सर्विस रूल्स और सेंट्रल पे स्केल लागू करने की मांग कर रही हैं जिससे सभी नर्सिंग कर्मचारियों को न्याय मिल सके। इससे पहले बुधवार को जीएमसीएच-32 में भी अभियान की शुरुआत की जा चुकी है।
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