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बस क्यू शेल्टर पर 15 मिनट बहस : फैसला हुआ- अब निर्माण और विज्ञापन का काम अलग-अलग

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चंडीगढ़। कई साल बीते, कई अधिकारी बदले, न जाने कितनी बार टेंडर हुए लेकिन बस क्यू शेल्टर नहीं बने। बुधवार को प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने वार्ड नंबर-21 से 26 तक के पार्षदों और सभी अधिकारियों को आमने-सामने बैठाया और मुद्दों पर सीधी बात कर जवाब मांगे। बैठक में लगभग सभी पार्षदों ने बस क्यू शेल्टर का मुद्दा उठाया। करीब 15 मिनट तक बहस हुई और फिर तय हुआ कि अब प्रशासन बस क्यू शेल्टर का निर्माण करेगा और यहां विज्ञापन लगाने का काम कंपनी को सौंपेगा। पिछले कई वर्षों से ये बस क्यू शेल्टर इसलिए नहीं बन पा रहे थे कि टेंडर में कहा गया था कि एक ही कंपनी निर्माण करेगी और फिर उस पर विज्ञापन लगाएगी। बैठक के दौरान कई मुद्दों पर सलाहकार खफा भी हुए। उन्होंने यहां तक कह दिया कि स्थितियों को देखकर ऐसा लगता है कि विभाग ही एक-दूसरे से बात ही नहीं करते।
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कब बनेगा बस क्यू शेल्टर?
पार्षद गुरप्रीत सिंह : बस क्यू शेल्टर की काफी समस्या है। नए बने नहीं, पुरानों की भी हालत खराब है।
सलाहकार धर्मपाल : परिवहन विभाग के सचिव बताएं?
सीबी ओझा : कोरोना की वजह से देरी हुई है। पहले कई बार टेंडर किया गया है। हम बना देंगे।
मेयर रविकांत शर्मा : पिछले ढाई साल से यही सुन रहे हैं। करोड़ों का नुकसान हो चुका है। नहीं बना सकते तो बता दें, हम बना देते हैं।
डीसी व परिवहन सचिव मनदीप बराड़ : पुराना मामला है। पहले निर्माण और विज्ञापन का काम एक कंपनी को करना था लेकिन अब इसे अलग-अलग करने का फैसला लिया गया है।
सीबी ओझा : ठीक है। हम बनाएंगे और फिर विज्ञापन के लिए देंगे।
पार्षद गुरप्रीत सिंह : जो बने हैं, उन पर विज्ञापन क्यों नहीं है?
सलाहकार : ये तो गंभीर बात है। क्यों नहीं विज्ञापन लग रहे हैं? विभागों को ठीक से काम करना चाहिए। एमसी को राजस्व की जरूरत है। इसको लेकर जल्द एक बैठक करेंगे।
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झाड़ियों की कटाई का मुद्दा उठते ही खफा हुए सलाहकार
पार्षद गुरप्रीत सिंह : प्रशासन की जमीन पर झाड़ियों को काटने के लिए कोई नहीं आता। कई बार शिकायत दी है।
सलाहकार : मैं सहमत हूं। मैंने भी देखा है। ये पूरे शहर की समस्या है। चीफ इंजीनियर बताएं, ये क्या हो रहा है?
सीबी ओझा : इसके लिए पूरा प्लान बनाया हुआ है। 15 दिन में आपको असर दिखना शुरू हो जाएगा।
मेयर रविकांत : खाली सरकारी मकानों की भी हालत खराब है। उनकी देखरेख नहीं होती। झाड़ियां उग आई हैं।
सलाहकार : जेई-एक्सईन की ड्यूटी लगाओ कि वह अपने-अपने इलाके में जाकर जांच करें और कटाई कराएं। नहीं जा सकते तो बताओ, मैं फिर फील्ड में निकलकर देखता हूं।
सीबी ओझा : नहीं सर, कटाई और प्रूनिंग के लिए पूरी योजना बनी हुई है। सभी की ड्यूटी निर्धारित की गई है। काम शुरू होते ही असर दिखेगा।
सलाहकार: इस पर ध्यान दो। सड़क, सफाई और पार्क ये किसी भी शहर की खूबसूरती को दर्शाते हैं।
कंपनियों की मनमानी, बिजली के तारों का जाल बिछा
पार्षद देवेश मोदगिल : स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी ने तारों का जाल बना दिया है। नंगी तारें झूल रही हैं।
सलाहकार : कौन सी कंपनी है?
चीफ इंजीनियर : आरईसी कंपनी पायलट प्रोजेक्ट चला रही है।
सलाहकार : वो पायलट प्रोजेक्ट ठीक से नहीं चला पा रहे हैं। ये गलत है। उन्हें चेतावनी दो।
पार्षद देवेश मोदगिल : समय की मांग है कि चंडीगढ़ में मेट्रो चलनी चाहिए।
सलाहकार: विचार करेंगे।
कम्यूनिटी सेंटर का काम धीमा, चुनाव से पहले कैसे होगा उद्घाटन
पार्षद भरत कुमार : इलाके में कम्यूनिटी सेंटर का काम बहुत धीमी गति से चल रहा है। कुछ करें।
एसई संजय अरोड़ा: साइट पर गए थे। तीन महीने में काम को पूरा देंगे। 30 नवंबर पर सौंप देंगे।
मेयर : तब तक तो आचार संहिता लग जाएगी। सात सेंटर बन रहे हैं। सभी का काम जल्द पूरा होना चाहिए।
पार्षद भरत कुमार: इन्होंने जुलाई में काम पूरा करने का दावा किया था।
सलाहकार : किसी भी तरह 30 अक्तूबर तक सभी का काम पूरा करो।
मनीमाजरा में गर्ल्स कॉलेज कब बनेगा?
पार्षद विनोद अग्रवाल: कई साल बीते गर्ल्स कॉलेज नहीं बना।
शिक्षा निदेशक रुबिंदरजीत सिंह बराड़ : जमीन मिली है लेकिन उस पर कुछ अतिक्रमण है।
पार्षद विनोद : जितनी खाली है, तब तक उस पर तो काम शुरू हो।
शिक्षा निदेशक: हमने कहा है कि तीन एकड़ की जमीन पर एडमिन ब्लॉक बनाने का काम शुरू करना चाहिए।
चीफ आर्किटेक्ट कपिल सेतिया : मौके पर हमने जाकर देखा है। जमीन टेढ़ी-मेढ़ी है। कुछ कोर्ट केस भी चल रहे हैं।
सलाहकार : अतिक्रमण को हटाओ। जिन्होंने केस किया है, उनसे बातचीत करो। कॉलेज के लिए लोग समझौता कर सकते हैं।
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