चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय में हर बड़े प्रस्ताव अब सीनेट के जरिए ही पास होंगे। एकतरफा निर्णय नहीं लिया जा सकेगा। माना जा रहा है कि नवंबर तक सभी बड़े मसलों को पीयू की सीनेट हल कर देगी।
पीयू की नैक रैंकिंग होनी है। इसे लेकर पीयू पर दबाव है। यदि नैक में पिछड़ गए तो पीयू के लिए कई रास्ते बंद होंगे। फंडिंग तक प्रभावित होगी। शिक्षकों की तैनाती तीन साल से नहीं हो पा रही है, जबकि इसके लिए रिक्तियां निकाली गई थीं। आवेदन भी मांगे गए थे। यह प्रस्ताव सीनेट की अनुमति के अभाव में रुका हुआ है।
इसी तरह विभागों के विलय का रास्ता भी साफ नहीं हो सका, जबकि कमेटी ने दो बार प्रस्ताव बना दिया है। इसे उच्चाधिकारियों के पास भी भेज दिया गया है, लेकिन इस पर अब तक अधिकारियों ने मुहर नहीं लगाई। इसके अलावा कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण लागू होने का प्रस्ताव अटका हुआ है। रोस्टर बनकर तैयार है और उच्चाधिकारियों के पास गया हुआ है। वहीं कई अन्य प्रस्ताव भी हैं जो लटके हैं। बताया जाता है कि अक्तूबर में सीनेट का गठन होगा। नवंबर तक पहली बैठक होने की उम्मीद है, जिसमें ये सभी मुद्दे ले जाए जा सकेंगे।